Sunday, February 15, 2026

आमाडांड शमशान घाट में तोड़े गए आदिवासी मट, ग्रामवासियों ने कलेक्टर से न्याय की गुहार लगाई

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कोरबा। 08 नवंबर 2024 – कोरबा जिले के ग्राम पंचायत रजगामार के अंतर्गत गाँव आमाडांड में स्थित आदिवासी समुदाय के शमशान घाट में अज्ञात लोगों द्वारा मट तोड़ने और शमशान स्थल पर अवैध कब्जा करने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। स्थानीय ग्रामीणों ने इस घटना को धार्मिक आस्था पर गहरी चोट बताते हुए कलेक्टर कोरबा से उचित कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में कहा गया है कि बीते वर्ष से लेकर अब तक कई बार इस पवित्र स्थल पर छेड़छाड़ हुई है, जिसके चलते आदिवासी समुदाय में भारी आक्रोश है।

200 वर्षों से अधिक पुरानी परंपरा हुई खंडित

ग्रामीणों के अनुसार, आमाडांड के इस शमशान घाट का आदिवासी समुदाय लगभग 200 वर्षों से उपयोग कर रहा है। मृत्यु के बाद मृत आत्मा की शांति के लिए परंपरानुसार यहाँ कच्चे मिट्टी का मट बनाकर उसमें दिया जलाया जाता है। लेकिन, नवंबर 2023 में कुछ अज्ञात लोग जेसीबी मशीन लेकर आए और सैकड़ों मट को ध्वस्त कर दिया। इस घटना से ग्रामीणों की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं और वे पिछले वर्ष 24 नवंबर को इस मामले की शिकायत लेकर कलेक्टर कोरबा के पास पहुंचे थे।

पुनः कब्जा करने का प्रयास, समुदाय में बढ़ा आक्रोश

हाल ही में अक्टूबर 2024 में, पुष्पा पांडे और संजु उर्फ टिंकु राय (बंगाली) नामक व्यक्तियों द्वारा शमशान घाट पर अवैध कब्जा करने की कोशिश की गई, जिससे ग्रामीणों में फिर से आक्रोश फैल गया। ग्रामीणों का कहना है कि शमशान घाट के मट तोड़े गए हैं, और कुछ मट अब भी टूटने से बचे हुए हैं। गाँव के बुजुर्गों के अनुसार, यहाँ हजारों की संख्या में नर कंकाल दबे हो सकते हैं, जो वर्षों से यहाँ अंतिम संस्कार के तौर पर दफनाए गए थे।

पाँचवीं अनुसूची क्षेत्र का दर्जा, प्रशासन से न्याय की गुहार

यह क्षेत्र संविधान की पाँचवीं अनुसूची के तहत आता है, जो विशेष संरक्षण के दायरे में है और यहाँ आदिवासी समुदाय की धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं का विशेष महत्व है। ग्रामीणों का कहना है कि मट तोड़ने की यह घटना संविधान और समुदाय की आस्थाओं का उल्लंघन है। उन्होंने जिला प्रशासन से माँग की है कि इस घटना को गंभीरता से लेकर दोषियों के खिलाफ अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अत्याचार अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाए।

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