रोजगार की कानूनी गारंटी
विस्थापित परिवारों के कम से कम एक सदस्य को पक्की सरकारी नौकरी’ की पुरानी मांग पर इस बजट में भी कोई स्पष्ट कानूनी गारंटी नहीं दी गई है कौशल उन्नयन को मजबूत करने की बात कही गयी इससे केवल निजी क्षेत्रो को लाभ होगा और कम वेतन और सामाजिक सुरक्षा के अभाव में युवाओं से काम लिया जाएगा जिससे शोषण ही बढ़ेगा ।
मुआवजे की दर
बढ़ती महंगाई को देखते हुए मुआवजे की गणना के फॉर्मूले में किसी बड़े बदलाव का जिक्र नहीं है ।
शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में कटौती
स्कूली शिक्षा में आबंटन में कमी कर दी गयी है और सार्वजनिक स्वास्थ के बजाय निजी क्षेत्र को बढ़ावा दिया जाएगा जिसके कारण गरीब किसानों को कोई लाभ नही मिल पायेगा ।
मनरेगा
ग्रामीण रोजगार के लिए महत्वपूर्ण योजना में बजट की कमी कर दी गयी है और राज्य सरकारों के भरोसे छोड़ दिया गया है सीधे तौर पर इस योजना को समाप्त करने की दिशा में सरकार कदम उठा रही है ।
पर्यावरण और प्रदूषण
आद्योगिकीकरण से उत्पन्न पर्यावरणीय असंतुलन और प्रदूषण के बढ़ने से लोंगो को स्वास्थ्य जनित समस्याओं से जूझना पड़ेगा किंतु इस बजट में इसके बारे में कोई चिंता नही की गई है
