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जगदलपुर, 23 दिसम्बर 2025/ परिक्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केन्द्र, कुम्हरावण्ड में मंगलवार 23 दिसंबर को ‘अखिल भारतीय समन्वित कन्द फसल अनुसंधान परियोजना’ के तहत आदिवासी उपयोजना के अंतर्गत एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यशाला में ग्राम कलेपाल, जामावाड़ा एवं बुरूगपाल से आए 30 से अधिक किसानों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को कंदवर्गीय फसलों की आधुनिक खेती से जोड़कर उनकी आय में वृद्धि करना और उन्हें तकनीकी रूप से सशक्त बनाना था।
कार्यक्रम की शुरुआत में मुख्य अतिथि एवं परिक्षेत्रीय अनुसंधान केन्द्र के सह-संचालक (अनुसंधान) डॉ. ए. के. ठाकुर ने किसानों को संबोधित किया। उन्होंने कंदवर्गीय फसलों में खरपतवार प्रबंधन की बारीकियों को समझाते हुए किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ-साथ कंद फसलों को अपनाने का सुझाव दिया, जिससे कृषि में विविधता आ सके। वहीं, कन्द फसल अनुसंधान परियोजना की प्रभारी डॉ. पद्माक्षी ठाकुर ने किसानों को प्रक्षेत्र का भ्रमण करवाया। उन्होंने मौके पर ही विभिन्न कंदीय फसलों की उत्पादन तकनीक और नई किस्मों की जानकारी दी। इस दौरान तिखुर प्रसंस्करण प्रक्रिया का जीवंत प्रदर्शन भी किया गया, जिससे किसानों ने मूल्य संवर्धन की प्रक्रिया को समझा।
प्रशिक्षण के तकनीकी सत्र में विषय विशेषज्ञ डॉ. एन. सी. मण्डावी, डॉ. प्रहलाद नेताम एवं डॉ. पंकज भार्गव ने कंदवर्गीय फसलों में लगने वाले विभिन्न रोगों और कीटों के बारे में विस्तार से चर्चा की और उनसे बचाव के वैज्ञानिक उपाय बताए। कार्यक्रम के समापन पर किसानों के उत्साहवर्धन के लिए उन्हें शकरकंद के तना कर्तन, उन्नत किस्म के सब्जी बीज और प्लास्टिक घमेला का वितरण किया गया। इस अवसर पर केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. चेतना खाडेकर, डॉ. खेमलता ठाकुर, डॉ. विनिता पाण्डेय, डॉ. रेशमा कौशल, सोमा बैछोर एवं रिचा सहित अन्य स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे।