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हाल ही में रिलीज़ हुई एक वेब सीरीज़ की कहानी, जो सच्ची घटनाओं से प्रेरित बताई जा रही है, अपने कथानक में जोखिम की कमी के कारण दर्शकों को निराश कर रही है। वेब सीरीज़ के एक लोकप्रिय संवाद “अगर रिस्क नहीं लेना है तो हम इस जॉब में क्या कर रहे हैं?” को देखें, तो यह सीरीज़ खुद उसी भावना को पूरा करने में असफल दिखती है। समीक्षा के अनुसार, इस सीरीज़ में पात्रों की कार्यशैली में वह रोमांच और जोखिम नज़र नहीं आता, जो दर्शकों को बांधे रख सके।
इस सीरीज़ को लेखक गौरव शुक्ला और भावेश मंडालिया ने लिखा है। यह उन गुमनाम जासूसों की कहानी है, जो देश के लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर देते हैं। ये ऐसे जासूस हैं जिन्हें उनके काम के लिए कभी सम्मान या पहचान नहीं मिलती। हालाँकि सीरीज़ का आधार मजबूत है और इसकी कहानी उन गुमनाम नायकों को सम्मान देने की कोशिश करती है, लेकिन प्रस्तुति में जोखिम की कमी इसकी रोचकता को कम कर देती है। दर्शकों को उम्मीद थी कि जासूसी पर आधारित यह सीरीज़ रोमांच और अप्रत्याशित मोड़ों से भरपूर होगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
संक्षेप में, सीरीज़ का विषय बहुत अच्छा है, लेकिन उसके क्रियान्वयन में जोखिम और रोमांच की कमी इसकी सबसे बड़ी कमज़ोरी बनकर उभरती है।