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सूरजपुर। अपराध विवेचना की गुणवत्ता बढ़ाने और साक्ष्य संकलन को मजबूत करते हुए आरोपियों को सजा दिलाने को लेकर रविवार, 14 दिसम्बर 2025 को जिला पंचायत के सभाकक्ष में बीएनएस, बीएनएसएस, एनडीपीएस एक्ट व पाक्सो एक्ट की 01 दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ जिला एवं सत्र न्यायाधीश सूरजपुर श्रीमती विनीता वार्नर द्वारा किया गया। इस अवसर पर कलेक्टर श्री एस.जयवर्धन, न्यायाधीश श्री मानवेन्द्र सिंह, श्री सुमित कुमार हर्षमाना, श्री आनंद प्रकाश वारियाल, डीआईजी व एसएसपी श्री प्रशांत कुमार ठाकुर मौजूद रहे। कार्यशाला में माननीय न्यायाधीशगण द्वारा नवीन कानूनों, प्रमुख धाराओं और कानूनी प्रक्रियाओं की बारीकियों से पुलिस अधिकारी व विवेचकों को अवगत कराया गया। कार्यशाला में विवेचकों के द्वारा विवेचना से जुड़े प्रश्नों को समाधान माननीय न्यायाधीशगण द्वारा किया गया।
इस अवसर पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती विनीता वार्नर ने कहा कि अपराध की विवेचना में त्रुटियां न हो यह सुनिश्चित करने यह कार्यशाला उपयोगी साबित होगी, विवेचकों में विवेचना के प्रति ज्ञान बढ़ेगा और पीड़ितों को न्याय व आरोपियों को सजा दिलाने में कारगर साबित होगा। उन्होंने विवेचना में एफआईआर से लेकर चालान पेश करने तक क्या-क्या कार्यवाही सुनिश्चित की जानी है, खामियां कहा होती है और विधिवत् तरीके से विवेचना पूर्ण करने जरूरी मार्गदर्शन दिए।
कलेक्टर सूरजपुर श्री एस.जयवर्धन ने कहा कि इस कार्यशाला से विवेचकों को लाभ होगा और विवेचना के स्तर में सुधार आएगा तथा अपराध करने वाले आरोपी सजा के दायरे में लाए जा सकेंगे।
प्रथम जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश श्री मानवेन्द्र सिंह ने कहा कि कई बार जानकारी के अभाव में एनडीपीएस एक्ट से जुड़े मामलों में चूक हो जाती है जिसका फायदा अभियुक्त को मिलता है। उन्होंने एनडीपीएस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने से लेकर सही तरीके से अनुसंधान की जानकारी दी। एनडीपीएस मामलों से जुड़ी चेकलिस्ट को साथ रखने कहा ताकि त्वरित कार्रवाई करने में सहूलियत हो। उन्होंने एनडीपीएस एक्ट की प्रमुख धाराओं और कानूनी प्रक्रियाओं, जांच की गुणवत्ता बढ़ाने और साक्ष्य संकलन को मजबूत करने मार्गदर्शन दिया।
द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री सुमित कुमार हर्षमाना ने नवीन कानून बीएनएस, बीएनएसएस के प्रावधानों को बताया और कहा कि विवेचना में प्रक्रियात्मक खामियां न करें, सबूतों को सही ढंग से इकट्ठा करें, डिजिटल साक्ष्यों को बारीकी से प्राप्त करें ताकि साक्ष्य मजबूत हो और अपराधी को दण्ड मिल सकें। 7 साल या उससे अधिक सजा वाले सभी अपराधों में फोरेंसिक जांच की अनिवार्यता के बारे में बताया।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री आनंद प्रकाश वारियाल के द्वारा पाक्सो एक्ट एवं जे.जे.एक्ट के महत्वपूर्ण प्रावधानों को बताया। उन्होंने कहा कि बच्चे की संवेदनशीलता, गोपनीयता और सर्वाेत्तम हितों को प्राथमिकता दे, बच्चे के बयान को संवेदनशील तरीके से रिकॉर्ड करें, अभिभावक या भरोसेमंद व्यक्ति की मौजूदगी सुनिश्चित की जाए और सभी पुख्ता सबूतों के साथ मामले की विवेचना पूर्ण करें।
कार्यशाला के आयोजक व जिले के डीआईजी व एसएसपी सूरजपुर श्री प्रशांत कुमार ठाकुर ने उपस्थित विवेचकों को कहा कि कार्यशाला से प्राप्त मार्गदर्शन का उपयोग बेहतर अपराध अनुसंधान में करें। कार्यशाला के माध्यम से माननीय न्यायाधीश का मार्गदर्शन पुलिस को तकनीकी बारीकियों को समझने, कानूनी रूप से मजबूत विवेचना में मददगार साबित होगा। उन्होंने विवेचकों को जांच की गुणवत्ता बढ़ाने और मजबूत साक्ष्य संकलन कर अभियोग पत्र पेश करने कहा ताकि पीड़ित को न्याय और दोषी को सजा मिल सके। कार्यक्रम का संचालन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संतोष महतो, आभार प्रदर्शन डीएसपी अनूप एक्का ने किया। इस दौरान सीएसपी एस.एस.पैंकरा, डीएसपी रितेश चौधरी, जिले थाना-चौकी प्रभारी सहित 141 विवेचक मौजूद रहे।