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पंचकुला, हरियाणा दुनिया के सबसे बड़े विज्ञान महोत्सव इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल 6 से 9 दिसंबर 2025 में छत्तीसगढ़ के तीन विज्ञान शिक्षकों ने अपने शोध, नवाचार और उत्कृष्ट विज्ञान शिक्षण कार्यों के आधार पर चयनित होकर प्रदेश का नाम गौरवान्वित किया। यह आयोजन विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित एक प्रतिष्ठित वार्षिक कार्यक्रम है, जिसमें देश- विदेश के वैज्ञानिक, शोधकर्ता, शिक्षक, विद्यार्थी और नवाचारकर्ता हिस्सा लेते हैं।
छत्तीसगढ़ से चयनित तीनों शिक्षक—
राष्ट्रपति अवॉर्डी डॉ. फरहाना अली, प्राचार्य, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय स्याहीमुड़ा, जिला कोरबा ,
छवि राठौर, व्याख्याता, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पोरथा, जिला सक्ती
गौरीशंकर कौशिक, शिक्षक, शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय कुरेली विकास खंड तखतपुर, जिला बिलासपुर
ने कार्यशाला एवं सेमिनार में भाग लिया और विज्ञान शिक्षण कीट तैयार करने में सहभागी बने।गुणवत्ता पूर्ण विज्ञान शिक्षा , नवाचार को बढ़ावा, तथा ग्रामीण क्षेत्रों में वैज्ञानिक सोच को प्रोत्साहित करने जैसे विषयों पर अपने विचार, अनुभव और सुझाव प्रस्तुत किए।
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विज्ञान शिक्षण में नवाचार पर हुई विस्तृत चर्चा
IISF 2025 के मुख्य सत्रों में STEM शिक्षा, स्कूलों में शोध-आधारित शिक्षण, नवाचार प्रयोगशालाओं का विकास, डिजिटल विज्ञान शिक्षा, जलवायु परिवर्तन, अंतरिक्ष विज्ञान, बायोटेक्नोलॉजी, और उभरते तकनीकी आयामों पर विस्तार से चर्चा की गई।
छत्तीसगढ़ के प्रतिभागी शिक्षकों ने ग्रामीण एवं जनजातीय क्षेत्रों में विज्ञान शिक्षा को सरल, रोचक और प्रयोगात्मक बनाने के अपने प्रयासों का खास उल्लेख किया, जिसे देशभर के शिक्षकों और विशेषज्ञों ने सराहा।
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ISRO अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन के साथ प्रेरणादायी संवाद
कार्यक्रम का सबसे आकर्षक क्षण रहा ISRO के वर्तमान अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन के साथ संवाद का अवसर।
डॉ. नारायणन—
रॉकेट और अंतरिक्ष यान प्रणोदन प्रणालियों के विश्वस्तरीय विशेषज्ञ हैं,
उन्होंने भारत की क्रायोजेनिक इंजन तकनीक को मजबूती देने में ऐतिहासिक योगदान दिया है,
वे भारत के महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष अभियानों चंद्रयान मिशन और गगनयान मानव अंतरिक्ष मिशन के प्रमुख वैज्ञानिकों में से एक रहे हैं।
उनसे मुलाकात के दौरान छत्तीसगढ़ के शिक्षकों ने छात्रों में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाने तथा स्कूलों में अंतरिक्ष- विज्ञान आधारित गतिविधियाँ विकसित करने पर उपयोगी सुझाव प्राप्त किए। डॉ. नारायणन ने शिक्षकों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि “भारत का अंतरिक्ष भविष्य देश के कक्षाओं में पढ़ रहे जिज्ञासु छात्र ही तय करेंगे। शिक्षक ही उनमें वैज्ञानिक सोच की नींव रखते हैं।”
इस आयोजन का मुख्य थीम था विकसित भारत के लिए विज्ञान से समृद्धि
* * केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह विज्ञान और प्रोद्योगिकी मंत्रालय भारत सरकार ने देश भर के वैज्ञानिकों, स्कूल, कॉलेजों के शिक्षकों को और विज्ञानिको को नवाचार तथा स्टार्टअप के लिए आह्वान किया।हरियाणा के मुख्य मंत्री श्री नायब सिंह सैनी भी उपस्थित रहे।
इस अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव कार्यशाला में छत्तीसगढ़ के चयनित शिक्षकों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। आयोजक समिति ने नई पीढ़ी में विज्ञान की गहरी समझ पैदा करने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं। कार्यक्रम समन्वयक, वैज्ञानिक नानारव तथा विज्ञान भारती के पदाधिकारी प्रोफेसर हेमंत पाण्डेय द्वारा नेशनल अवॉर्डी टीचर , डॉ फरहाना अली को मोमेंटो प्रदान कर विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
*प्रदेश का गौरव बढ़ाने वाला मौका
इस राष्ट्रीय आयोजन में शामिल होना न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह पूरे राज्य की विज्ञान शिक्षा के लिए गौरवपूर्ण क्षण है। तीनों शिक्षकों ने कहा कि वे यहाँ से प्राप्त अनुभव, ज्ञान और नवीन शिक्षण मॉडल को अपने-अपने विद्यालयों में लागू करेंगे ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थियों को विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर मिले।