एमडीयू में महिला स्वच्छता कर्मियों से मासिक धर्म का सबूत मांगने पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने की न्यायिक जांच की मांग, केंद्र और हरियाणा सरकार को नोटिस देने की अपील

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नई दिल्ली: हरियाणा के रोहतक स्थित महार्षि दयानंद विश्वविद्यालय (MDU) में महिला स्वच्छता कर्मियों से मासिक धर्म (Menstrual Proof) का सबूत मांगने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। अब इस पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर इस पूरे मामले की न्यायिक जांच (Judicial Inquiry) की मांग की है।

मानवाधिकार उल्लंघन की जांच की मांग

याचिका में केंद्र सरकार और हरियाणा सरकार को निर्देश देने की अपील की गई है कि इस घटना की पूरी और निष्पक्ष जांच कराई जाए।
साथ ही, भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश (Guidelines) जारी किए जाएं ताकि महिलाओं और किशोरियों की गरिमा, निजता और स्वतंत्रता का उल्लंघन न हो।

SCBA ने कहा कि यह मामला केवल तीन महिलाओं का नहीं बल्कि पूरे देश में कार्यस्थल पर महिला सम्मान और अधिकारों की रक्षा से जुड़ा है।

क्या है मामला?

घटना 26 अक्टूबर की है, जब एमडीयू में हरियाणा के राज्यपाल असीम कुमार घोष के दौरे से कुछ घंटे पहले तीन महिला स्वच्छता कर्मियों ने गंभीर आरोप लगाए थे।
उन्होंने कहा कि दो सुपरवाइजर्स ने उनसे कहा कि वे अपने निजी अंगों की तस्वीरें भेजकर यह साबित करें कि वे पीरियड्स में हैं।

इस घटना के सामने आने के बाद पूरे विश्वविद्यालय परिसर में हड़कंप मच गया और महिला संगठनों ने इसे महिला गरिमा का अपमान बताया।

SCBA का बयान

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने कहा कि इस घटना ने महिला कर्मचारियों के मानवाधिकारों और निजता के अधिकार (Right to Privacy) का गंभीर उल्लंघन किया है।
संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रत्येक व्यक्ति को गरिमा के साथ जीने का अधिकार है, और यह घटना इस सिद्धांत के विपरीत है।

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