|
Getting your Trinity Audio player ready...
|
जगदलपुर/बस्तर | दिनांक: 08 जनवरी 2026 ”बस्तर की लाल मिट्टी देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, लेकिन अफसोस कि इसी मिट्टी का बेटा आज रोजगार के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है।” इन कड़े शब्दों के साथ आज युवा कांग्रेस के बस्तर लोकसभा समन्वयक श्री आदित्य सिंह बिसेन ने बस्तर के अधिकारों की लड़ाई का नया अध्याय शुरू किया। श्री बिसेन के नेतृत्व में एक विशाल प्रतिनिधिमंडल ने आज मुख्यमंत्री महोदय के नाम (जिला दंडाधिकारी के माध्यम से) एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा, जिसमें बस्तर संभाग में शासकीय, निजी और केंद्रीय उपक्रमों (NMDC/NISP) में स्थानीय युवाओं के लिए 50% आरक्षण की नीति लागू करने की मांग की गई है।
आखिर बस्तर के साथ यह सौतेला व्यवहार क्यों?
मीडिया और उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए श्री आदित्य सिंह बिसेन ने आंकड़ों और प्रशासनिक तर्कों के साथ सरकार को घेरा। उन्होंने पूछा, “हम सरकार से एक सीधा सवाल पूछना चाहते हैं— जब गुजरात जैसा समृद्ध राज्य अपने उद्योगों में 85% स्थानीय भर्ती अनिवार्य कर सकता है, जब महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश अपने ‘मूल निवासियों’ (Sons of the Soil) के लिए 75-80% नौकरियां आरक्षित रख सकते हैं, तो बस्तर के आदिवासियों और स्थानीय निवासियों के हिस्से में केवल प्रदूषण और बीमारी क्यों?”
उन्होंने आगे कहा, “क्या हमारे युवाओं की योग्यता कम है? या फिर बस्तर को केवल एक ‘खनन कॉलोनी’ समझा जा रहा है? यह अब और नहीं चलेगा।”
”सच्चा बस्तरवाद: अधिकार, सम्मान और रोजगार”
श्री बिसेन ने ‘बस्तरवाद’ को परिभाषित करते हुए एक नई दिशा दी। उन्होंने कहा:
“लोग बस्तरवाद से डरते हैं, लेकिन हमारे लिए ‘बस्तरवाद’ का अर्थ है— बस्तर के संसाधनों पर बस्तर के युवाओं का पहला हक। अगर हमारी जमीन पर स्टील प्लांट लगेगा, तो AC केबिन में बैठने वाले मैनेजर से लेकर मशीन चलाने वाले ऑपरेटर तक, 50% चेहरा बस्तर का होना चाहिए। यही असली बस्तरवाद है, यही सच्चा विकास है।”
बस्तर संभाग की समस्त विभागीय भर्तियों में 50% सीटें स्थानीय आरक्षित हों। विशेष रूप से तृतीय और चतुर्थ श्रेणी (Class III & IV) के पदों पर 100% भर्ती केवल बस्तर संभाग के निवासियों से ही की जाए।
NMDC बैलाडीला की खदानों और नगरनार स्टील प्लांट में ‘एग्जीक्यूटिव’ (अधिकारी) से लेकर ‘नॉन-एग्जीक्यूटिव’ पदों तक, हर नई भर्ती में 50% कोटा बस्तर के युवाओं के लिए फिक्स किया जाए।
भविष्य में बस्तर में आने वाली कोई भी प्राइवेट कंपनी, पावर प्लांट या माइनिंग प्रोजेक्ट तभी काम शुरू कर पाएगी, जब वह अपनी ‘HR पॉलिसी’ में स्थानीय युवाओं को 50% नौकरी देने का लिखित समझौता करेगी।
आर-पार की लड़ाई का ऐलान:
युवा कांग्रेस ने प्रशासन को स्पष्ट अल्टीमेटम दिया है कि यह ज्ञापन कोई रस्म-अदायगी नहीं है। श्री बिसेन ने चेतावनी देते हुए कहा, “हम शांतिप्रिय हैं, लेकिन कमजोर नहीं। यदि सरकार ने अन्य राज्यों (झारखंड/आंध्र प्रदेश) की तर्ज पर बस्तर के लिए ‘विशेष रोजगार नीति’ नहीं बनाई, तो हम ‘बस्तर रोजगार अधिकार आंदोलन’ शुरू करेंगे। तब चक्काजाम भी होगा और खदानों का काम भी रुकेगा। अब बस्तर का युवा अपना हक छीन कर लेगा।”
इस अवसर पर वरिष्ठ युवा कांग्रेस नेता रोहित पानीग्राही,NSUI जिलाध्यक्ष विशाल खंबारी,NSUI शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय अध्यक्ष पंकज केवट,युवा नेता नूरेंद्र राज साहू,NSUI ब्लॉक अध्यक्ष कर्तृत्व आचार्य,युवा नेता फैसल नवी,कुणाल पांडे,दीपेश पांडे,कुणाल पटेल,सौरव जोशी,देवांश दास,रियान खान,देव,तरुण एवं अन्य युवा साथी उपस्थित रहे, जिन्होंने एक स्वर में “रोजगार हमारा अधिकार” के नारे लगाए।