कोरबा/छत्तीसगढ़ : इस साल शिक्षा विभाग अपनी कार्य को लेकर समाचार पत्रों में सुर्खियों में रहा है शासन प्रशासन के शिक्षक युक्तिकरण को लेकर शिक्षक विभाग से लेकर उच्च न्यायालय बिलासपुर तक भागदौड़ करते रहे अंततः उच्च न्यायालय बिलासपुर ने भी शासन प्रशासन की शिक्षक युक्तिकरण को सही माना!



शासन प्रशासन की शिक्षक युक्तिकरण शिक्षकों में भूचाल ला दिया कोई भी शिक्षक अपनी पदस्थापन से हटना नहीं चाहता था इसके लिए अपने अपने स्तर पर जोगाड़ देख रहे थे! कोरबा विकास खंड के प्राथमिक शाला केसला में प्रधान पाठक रामायण पटेल और उनकी पत्नी पदस्थ हैं शिक्षक युक्तिकरण में उनकी पत्नी का ट्रांसफर अन्यत्र दूरस्थ क्षेत्र में होने की आशंका हो रही थी तब उनके परिचित माध्यमिक शाला बेला में पदस्थ शिक्षक विनोद कुमार साण्डे से संपर्क हुआ जो रजगामार ओमपुर के संकुल शैक्षिक समन्वयक थे!
विनोद कुमार साण्डे ने अपनी डीईओ बीईओ और विभाग में ऊची पहुँच का हवाला देते हुए शिक्षक रामायण पटेल की पत्नी के युक्तियुक्तकरण के अंतर्गत ओमपुर व उसके आसपास करने के लिए 2,00,000/ रुपये में करने का सौदा तय हुआ था लेकिन शिक्षक रामायण पटेल ने इसकी शिकायत एसीबी बिलासपुर से कर दी और एसीबी बिलासपुर ने शिक्षक विनोद कुमार साण्डे को 17/07/25 को रिश्वत लेते रंगें हाथों पकड़ कर जेल दाखिल कर दिया जिला शिक्षा अधिकारी कोरबा की अनुशंसा पर संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग बिलासपुर ने 23/07/25 को निलंबित कर दिया गया था!
गौर करने वाली बात है की शिक्षक विनोद कुमार साण्डे का शिक्षा विभाग में जलवा और दबदबा बरक़रार है विकास खंड शिक्षा अधिकारी कोरबा ने 17/10/25 को आदेश जारी करते हुए भ्रष्टाचार में लिप्त शिक्षक विनोद कुमार साण्डे को फिर से माध्यमिक शाला बेला पदस्थ किया गया है और जिस पर भ्रष्टाचार का आरोप एसीबी द्वारा चलाया जा रहा है ऐसे भ्रष्ट शिक्षक को फिर से रजगामार ओमपुर के संकुल शैक्षिक समन्वयक बनाया गया है जिससे शिक्षा विभाग के कार्यशैली और विश्वनीयता पर सवाल खड़े हो रहें हैं
