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कोरबा, छत्तीसगढ़: सिविल लाइंस रामपुर थाने की एक कनिष्ठ महिला पुलिस अधिकारी पर लगे गंभीर आरोपों ने पूरे पुलिस विभाग में हड़कंप मचा दिया है। दुष्कर्म की एक पीड़िता ने सीधे राज्य महिला आयोग को लिखित शिकायत दे कर आरोप लगाया है कि सिविल लाइंस थाने में पदस्थ सब-इंस्पेक्टर अनिता खेस ने न केवल आरोपी को संरक्षण दिया, बल्कि पीड़िता से जाँच के नाम पर लिए गए साक्ष्य और सबूतों को प्रकरण से गायब कर दिया।
शिकायतकर्ता ने महिला आयोग को सौंपे ज्ञापन में सनसनीखेज खुलासा करते हुए कहा कि अधिकारी अनिता खेस ने फरार आरोपी प्रवीण डहरिया की खोजबीन के नाम पर उनसे ₹20,000 (बीस हजार रुपये) भी ले लिए।
0 एसपी से शिकायत के बाद भी नतीज़ा शून्य
पीड़िता का आरोप है कि उसने खुद अपनी तरफ से आरोपी के छिपने के ठिकाने की जानकारी पुलिस को दी थी। जब आरोपी को गिरफ्तार किया गया, तो पीड़िता ने अपनी वॉट्सऐप चैट, फेसबुक चैट के प्रिंटआउट, एसएमएस के प्रिंटआउट और इनके पेनड्राइव जैसे ठोस साक्ष्य अधिकारी अनिता खेस को सौंपे थे।
लेकिन जब पीड़िता को कोर्ट में बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया गया, तब उसे पता चला कि उसके द्वारा दिए गए साक्ष्य-सबूत, कपड़े और पेनड्राइव कोर्ट में जमा ही नहीं कराए गए हैं।
0 सबूत मांगने पर गाली-गलौज, अधिकारी और आरोपी की साठगांठ का आरोप
पीड़िता ने अपनी शिकायत में आगे कहा कि जब उसने पुनः थाने जाकर साक्ष्य जमा न करने का कारण पूछा, तो जाँच अधिकारी अनिता खेस ने उन्हें गाली-गलौज कर थाने से भगा दिया।
पीड़िता ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अधिकारी अनिता खेस और आरोपी की सीधी साठगांठ दिखाई देती है। पीड़िता ने इसकी शिकायत पुलिस अधीक्षक से भी की थी, लेकिन पुलिस विभाग से संबंधित होने के बावजूद आज दिनांक तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे परिणाम शून्य रहा।
पीड़िता ने महिला आयोग से न्याय और सुरक्षा की गुहार लगाते हुए जाँच अधिकारी अनिता खेस के कदाचरण और उन्हें धमकाने के संबंध में कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। इस संबंध में संबंधित अधिकारी से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।

