नई दिल्ली। इस्लाम धर्म का सबसे पवित्र महीना रमज़ान जल्द शुरू होने वाला है। वर्ष 2026 में रमज़ान की शुरुआत 19 या 20 फरवरी से होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि अंतिम फैसला चांद के दीदार पर निर्भर करेगा, इसलिए आधिकारिक घोषणा चांद दिखने के बाद ही की जाएगी।
रमज़ान इस्लामी कैलेंडर का नौवां महीना होता है, जिसे इबादत, आत्मसंयम और आध्यात्मिक शुद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान मुस्लिम समुदाय पूरे महीने रोज़ा रखकर अल्लाह की इबादत करता है, दुआ करता है और जरूरतमंदों की मदद करता है।
आध्यात्मिक शुद्धि और इबादत का महीना
रमज़ान के दौरान रोज़ा सुबह सेहरी से पहले शुरू होता है और सूर्यास्त के बाद इफ्तार के साथ खोला जाता है। दिन में पांच वक्त की नमाज़ अदा की जाती है, जबकि रात में तरावीह की विशेष नमाज़ पढ़ी जाती है।
धार्मिक मान्यता है कि इस महीने में किए गए नेक कामों का सवाब कई गुना बढ़ जाता है। साथ ही ज़कात और फ़ितरा देने का विशेष महत्व होता है, जिससे समाज में जरूरतमंदों की मदद हो सके।
रोज़ा क्यों रखा जाता है
इस्लाम में रोज़ा रखना हिजरी कैलेंडर के दूसरे वर्ष (लगभग 624 ईस्वी) में अनिवार्य किया गया था। इसे इस्लाम के पांच स्तंभों में शामिल किया गया है— कलमा, नमाज़, रोज़ा, ज़कात और हज। रोज़ा आत्मसंयम, अनुशासन और ईश्वर के प्रति समर्पण का प्रतीक माना जाता है।
तारीख को लेकर कन्फ्यूजन क्यों
इस्लामी कैलेंडर चंद्रमा पर आधारित होता है, इसलिए नया महीना चांद दिखने पर शुरू होता है। अलग-अलग देशों में चांद अलग दिन दिख सकता है, इसी कारण रमज़ान की शुरुआत की तारीख में अंतर हो सकता है।
