Saturday, January 17, 2026

Paush Putrada Ekadashi 2025 : पौष पुत्रदा एकादशी 2025 सनातन धर्म में क्यों है यह व्रत अत्यंत महत्वपूर्ण

Must Read
Getting your Trinity Audio player ready...

Paush Putrada Ekadashi 2025 : सनातन धर्म में एकादशी तिथि का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है, विशेषकर पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत। यह व्रत विघ्नों को दूर करने, भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की कृपा पाने और विशेष रूप से संतान की प्राप्ति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इसमें भक्त विधिपूर्वक व्रत रखते हैं, भगवान विष्णु की उपासना करते हैं और मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करते हैं।

छत्तीसगढ़ अखबार वितरण संघ के वार्षिक कैलेंडर 2026 का विमोचन संपन्न, टीपी नगर, कोरबा स्थित कार्यालय में हुआ गरिमामय कार्यक्रम

पौष पुत्रदा एकादशी 2025 — तिथि और समय

2025 में पौष पुत्रदा एकादशी तिथि को लेकर दो प्रमुख दिनांक सामने आए हैं:

  • मुख्य दिन: 30 दिसंबर 2025 (मंगलवार) — यह दिन द्रिक पंचांग के अनुसार पौष पुत्रदा एकादशी व्रत रखने के लिए मुख्य दिन है।

  • 31 दिसंबर 2025 (बुधवार) — वैष्णव परंपरा के अनुसार इस दिन भी पौष पुत्रदा एकादशी व्रत मनाया जाता है और कई लोग इसी दिन व्रत का पालन करते हैं।

🕐 एकादशी तिथि का आरंभ

  • प्रातः 30 दिसंबर सुबह ~07:50 बजे से शुरू होकर 31 दिसंबर सुबह ~05:00 बजे तक रहती है।

व्रत का धार्मिक महत्व

पौष पुत्रदा एकादशी को भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की उपासना के साथ संतान के वरदान तथा सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखा जाता है। माना जाता है कि शुभ मुहूर्त में विधिपूर्वक व्रत पालन करने से दोष व पाप नष्ट होते हैं और जीवन में खुशहाली आती है।

पूजा-विधि और शुभ मुहूर्त

शुभ मुहूर्त (अनुमानित)
📌 यह समय स्थानीय समय व पंचांग के अनुसार भिन्न हो सकता है:

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 05:24 बजे से 06:19 बजे तक

  • प्रातः सन्ध्या: सुबह 05:51 बजे से 07:13 बजे तक

  • अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:03 बजे से 12:44 बजे तक

  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:07 बजे से 02:49 बजे तक

  • निशीठा मुहूर्त: रात 11:57 बजे से 12:51 बजकर तक

व्रत पूजा विधि:

  1. सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर शुद्ध पीले वस्त्र धारण करें।

  2. घर के मंदिर में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।

  3. पीले फूल, पंचामृत, तुलसी के पत्ते, फल, मिठाइयाँ तथा देसी घी का दीपक अर्पित करें।

  4. विष्णु मंत्र का जाप व भजन-कीर्तन करें।

  5. रातभर जागरण या भजन साधना करना शुभ माना जाता है।

व्रत का पारण (उपवास समाप्ति)

  • 31 दिसंबर 2025 को दोपहर ~1:29 बजे से 3:33 बजे के बीच पारण करना शुभ कहा गया है।

पारण के समय तुलसी, तिल, पंचामृत और प्रसाद अर्पित कर व्रत तोड़ा जाता है। यह समय स्थानीय पंचांग अनुसार थोड़ा भिन्न भी हो सकता है, अतः द्रिक पंचांग से सुनिश्चित कर लें।

धार्मिक मान्यताएँ और लाभ

  • इस एकादशी व्रत से संतान की प्राप्ति की श्रेष्ठ कामना की जाती है।

  • भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की कृपा से सभी बाधाओं का निवारण और जीवन में सुख-समृद्धि की वृद्धि होती है।

  • व्रती अपने मन से रज, क्रोध, द्वेष तथा नकारात्मक विचारों को त्यागकर सच्चे मन से व्रत करते हैं।

Latest News

कोरबा: दीपका थाना क्षेत्र में युवती की बेरहमी से हत्या, इलाके में फैली सनसनी

कोरबा जिले के दीपका थाना क्षेत्र अंतर्गत नागिन झोरखी इलाके में एक सनसनीखेज और हृदयविदारक घटना सामने आई है।...

More Articles Like This