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सक्ती / कलेक्टर कार्यालय से लगी हुई खसरा नंबर 1311/1,1311/2, 1311/3,1311/4, 1311/5 को बेजा कब्जा से मुक्त कराने के संबंध गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने मोर्चा खोल दिया है बता दे कलेक्टर परिसर से लगी हुई खसरा नंबर 1311/1,1311/2, 1311/3, 1311/4, 1311/5 रकबा लगभग 12 एकड़ से अधिक शासकीय रिकार्ड में दर्ज उपरोक्त भूमि कलेक्टर परिसर से सटे होने के साथ-साथ नैशलन हाईवे से भी लगी हुई है। खसरा नंबर 1311/1,1311/2, 1311/3, 1311/4,1311/5 बहुत ही बेसकीमती शासकीय भू-खण्ड है जिसे जमीन दलालों के द्वारा छल पूर्वक लाभ कमाने के उद्देश्य से अपने कब्जे में रखा गया है। उपरोक्त भू-खण्डों में से कुछ भू-सखण्डों को प्रतिकर जमीन दलालों के द्वारा सखरीदी-बिक्री अवैध तरीके से कर दी गई है।
उक्त भू-सखण्डों पर नवीन जिला सक्ती के लिए शासकीय कार्यालय / शासकीय भवन / शासकीय विश्राम गृह / शासकीय सार्वजनिक उद्देश्य के लिए उपयोग में लाया जा सकता है। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के पदाधिकारी ने शक्ति जिला के कलेक्टर से निवेदन है कि उक्त भू-खण्डो को शासकीय कब्जे में लेकर जमीन दलालो से मुक्त कराया जाए।
पटवारी पर लगे गंभीर आरोप
कलेक्टर कार्यालय से लगी हुई ग्राम पंचायत सकरेली के खसरा नंबर 1311 को लेकर पटवारी पर गंभीर आरोप लगने लगे हैं लोगों का मानना है कि स्वयं के एक नंबर के काम के लिए अगर इनके पास जाया जाता है तो वह कई चक्कर कटवाते हैं। वही शासकीय जमीन का बड़े आसानी से बंटाकन कर 1311/4 का बिक्री छांट पटवारी द्वारा जारी कर दिया गया। इससे साफ पता चलता है कि राजस्व अभिलेखों में कुटरचना कर शासकीय भूमि को निजी हाथों में सौपने भरपूर प्रयास किया जा रहा था । इस मामले में एक बड़ा प्रश्न यहां भी खड़ा होता है कि अगर राजस्व नियमों की बात करें तो शासकीय मद की भूमि का बटवारा नहीं किया जा सकता, और यदि कुछ विशेष परिस्थिति आती है तो कलेक्टर की अनुमति अनिवार्य होता है। वही खसरा 1311 को 1311/1, 1311/2, 1311/3 और 1311/4 में कैसे बांट दिया गया, इसकी कोई जानकारी रिकॉर्ड में नहीं है।
सबकी नजर प्रशासनिक कार्यवाही पर
वैसे इस प्रकार के मामले सक्ती में कोई नए नहीं है, परंतु यह मामला जिस प्रकार से सामने आया है उससे लोगों को प्रशासनिक कार्यवाही की बड़ी बेसब्री से इंतजार है लोगों का मानना है कि अगर शासकीय जमीन को बचाना है तो इस प्रकार के मामले में बड़ी कार्यवाही होनी चाहिए जिससे राजस्व विभाग में बैठे उन जयचंदो को भी सबक मिल सके और जमीन दलाल भी दोबारा ऐसा हिम्मत कर ना करें अब देखना यहां है कि प्रशासन इस मामले को लेकर क्या कार्यवाही करती है।