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झारखंड सरकार ने एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए राज्य के सरकारी स्कूलों के पाठ्यक्रम में दिशोम गुरु शिबू सोरेन की जीवनी को शामिल करने का निर्णय लिया है। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने इसके लिए एक प्रस्ताव तैयार किया है, जिसका उद्देश्य युवाओं को शिबू सोरेन के संघर्ष और उनके जीवन से प्रेरणा देना है।
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पाठ्यक्रम में शामिल करने की प्रक्रिया
स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने इस प्रस्ताव को अंतिम रूप देने के लिए 31 अगस्त की समय सीमा निर्धारित की है। प्रस्ताव तैयार होने के बाद इसे राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। यदि सब कुछ योजना के अनुसार हुआ, तो अगले शैक्षणिक सत्र (2026-27) से कक्षा 1 से लेकर 12 तक के पाठ्यक्रम में शिबू सोरेन के जीवन के विभिन्न पहलुओं को जोड़ा जाएगा।
क्यों लिया गया यह फैसला?
शिबू सोरेन को झारखंड की राजनीति और आदिवासी अधिकारों के लिए किए गए संघर्ष के लिए जाना जाता है। उन्हें झारखंड राज्य के निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के लिए ‘दिशोम गुरु’ (देश के गुरु) की उपाधि दी गई है। सरकार का मानना है कि उनकी जीवनी को पाठ्यक्रम में शामिल करने से छात्रों को उनके संघर्ष, बलिदान और समाज के प्रति उनके योगदान के बारे में जानने का मौका मिलेगा, जिससे उनमें नेतृत्व और सेवा की भावना पैदा होगी।
बढ़ाएगा गर्व और जागरूकता
यह कदम झारखंड के छात्रों में अपने राज्य के इतिहास और नेताओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने में मदद करेगा। यह उन्हें अपनी सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत पर गर्व करने के लिए प्रेरित करेगा। इस कदम का राज्य भर में स्वागत किया गया है, जहां लोगों का मानना है कि यह शिबू सोरेन जैसे महान व्यक्तित्वों को सच्ची श्रद्धांजलि है।