Saturday, February 21, 2026

जिला जेल सूरजपुर में आयोजित हुई युवा बंदियों के पुनर्वास के लिए निश्चय कार्यक्रम।

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सूरजपुर। जेल एवं सुधारात्मक सेवाएं छत्तीसगढ़ द्वारा निश्चय कार्यक्रम की शुरूवात की गई है जिसमें युवा बंदियों के पुनर्वास की पहल करना है। इसमें मुख्य रूप से 18 से 30 वर्ष की आयु वर्ग के अपराधियों को पुनः अपराध में नहीं लौटने के लिए प्रेरित करना तथा पुनर्वास के लिए कौशल विकास हेतु प्रोत्साहित करना है।
गुरूवार, 19 फरवरी 2026 को कलेक्टर सूरजपुर श्री एस. जयवर्धन एवं डीआईजी/एसएसपी सूरजपुर श्री प्रशांत कुमार ठाकुर ने जिला जेल सूरजपुर में निश्चय कार्यक्रम में विचाराधीन बंदियों के पुनर्वास, उनकी सोच में सकारात्मक बदलाव और उन्हें मुख्यधारा में वापस लौटने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर कलेक्टर सूरजपुर ने कहा कि जेल की चारदीवारी को केवल सजा का स्थान न मानकर, उसे सुधार गृह के रूप में विकसित करें, अच्छे कार्यो को सीखे, गलत कार्यो से दूर रहे, अपने कार्य व्यवहार में सुधार लाए और यहां से बाहर निकलने पर एक नई शुरूवात करें। सकारात्मक बदलाव के लिए योग, ध्यान और काउंसलिंग सत्र का भरपूर उपयोग करने हेतु प्रोत्साहित किया।
डीआईजी व एसएसपी श्री प्रशांत कुमार ठाकुर ने कहा कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्धेश्य युवा बंदियों के पुनर्वास, उनकी सोच में सकारात्मक बदलाव और उन्हें मुख्य धारा में वापस लाने के लिए एक सुधारात्मक पहल है जिसमें शिक्षा, कौशल विकास, संस्कार और स्वास्थ्य पर केंद्रित है। डीआईजी/एसएसपी ने विचाराधीन बंदियों से कहा कि आपने जो किया उसे यहां भुले और बाहर निकलने पर नए सकारात्मक विचार के साथ आगे बढ़े, गलत कार्यो से दूरी बनाते हुए समाज में लोगों, युवा पीढ़ी को गलत कार्यो व अपराध से दूरी बनाने के लिए प्रोत्साहित करें ताकि युवा पीढ़ी गलत कार्यो में न फंसे। निराशा को दूर कर एक नई शुरूवात को अवसर देने यह एक व्यापक सुधारात्मक प्रयास है जिसका लाभ उठाने हेतु सभी को प्रेरित किया।
जिला जेल अधीक्षक अक्षय तिवारी ने बंदियों को बताया कि पुलिस महानिदेशक जेल छत्तीसगढ़ श्री हिमांशु गुप्ता के मार्गदर्शन में निश्चय कार्यक्रम चलाया जा रहा है जिसके तहत बंदियों को अपराध से दूर रहने, कानून का पालन करने और बाहर जाकर समाज के उपयोगी नागरिक बनाने के लिए प्रेरित करना है, इसके लिए योग, आर्ट ऑफ लिविंग व कानूनी जागरूकता के आयोजन नियमित की जा रही है। आगामी दिनों में कौशल विकास के तहत विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण भी दिए जायेंगे ताकि रिहाई के बाद बंदी आत्मनिर्भर बन सके। इस अवसर पर विचारधीन बंदी व जेल स्टाफ मौजूद रहे।

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