Friday, January 16, 2026

AMU अल्पसंख्यक दर्जे पर नई बेंच फैसला करेग सुप्रीम कोर्ट ने 1967 का फैसला पलटा

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गाजियाबाद ,अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी यानी AMU के अल्पसंख्यक दर्जे पर फैसला अब सुप्रीम कोर्ट की 3 जजों की बेंच करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि बेंच इस फैक्ट की जांच करेगी कि क्या AMU को अल्पसंख्यकों ने स्थापित किया था।

सुप्रीम कोर्ट के 7 जजों की संवैधानिक बेंच ने शुक्रवार को 4:3 के बहुमत से फैसला दिया कि AMU संविधान के आर्टिकल 30 के तहत अल्पसंख्यक दर्जे की हकदार है। खास बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने ही 1967 के फैसले में कहा था कि AMU अल्पसंख्यक संस्थान के दर्जे का दावा नहीं कर सकती है।

उस समय अजीज बाशा केस में कोर्ट ने कहा था कि AMU सेंट्रल यूनिवर्सिटी है। इसकी स्थापना न तो अल्पसंख्यकों ने की थी और न ही उसका संचालन किया था। सुप्रीम कोर्ट के ही 3 जजों की बेंच अब इसी पर फैसला सुनाएगी।

ताजा विवाद 2005 में शुरू हुआ, जब AMU ने खुद को अल्पसंख्यक संस्थान माना और मेडिकल के PG कोर्सेस की 50% सीटें मुस्लिम छात्रों के लिए आरक्षित कर दीं। हिंदू छात्र इसके खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट गए।

हाईकोर्ट ने AMU को अल्पसंख्यक संस्थान नहीं माना। इसके खिलाफ AMU सुप्रीम कोर्ट गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में इस मामले को 7 जजों की संवैधानिक बेंच को ट्रांसफर कर दिया था।

  • 1817  में दिल्ली के सादात (सैयद) खानदान में सर सैयद अहमद खान का जन्म हुआ। 24 साल की उम्र में सैयद अहमद मैनपुरी में उप-न्यायाधीश बन गए। इस समय ही उन्हें मुस्लिम समुदाय के लिए अलग से शिक्षण संस्थान की जरूरत महसूस हुई।
  • अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी शुरू करने से पहले सर सैयद अहमद खान ने मई 1872 में मुहम्मदन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज फंड कमेटी बनाया। इस कमेटी ने 1877 में मुहम्मदन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज की शुरुआत की।
  • इस बीच अलीगढ़ में एक मुस्लिम यूनिवर्सिटी की मांग तेज हो गई। जिसके बाद मुस्लिम यूनिवर्सिटी एसोसिएशन की स्थापना हुई। 1920 में ब्रिटिश सरकार की मदद से कमेटी ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी एक्ट बनाकर इस यूनिवर्सिटी की स्थापना की।
  • अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी बनाए जाने के बाद पहले से बनी सभी कमेटी को भंग कर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के नाम से एक नई कमेटी बनी। इसी कमेटी को सभी अधिकार और संपत्ति सौंपी गई।
  • ABVP और दूसरे दक्षिण पंथी संगठनों का कहना है कि राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने इस यूनिवर्सिटी की स्थापना के लिए 1929 में 3.04 एकड़ जमीन दान दी थी। ऐसे में इस यूनिवर्सिटी के संस्थापक सिर्फ सर अहमद खान को नहीं बल्कि हिंदू राजा महेंद्र प्रताप सिंह भी हैं।
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