Tuesday, February 24, 2026

Petition against Reliance Jio : कोर्ट परिसर में नेटवर्क गायब, आकाश–ईशा अंबानी बने याचिका में पक्षकार

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Petition against Reliance Jio पानीपत। अक्सर लोग खराब मोबाइल नेटवर्क की शिकायत कस्टमर केयर से करते हैं, लेकिन पानीपत के वकीलों ने एक कदम आगे बढ़ते हुए सीधा अदालत का दरवाजा खटखटाया है। जिला कोर्ट परिसर में मोबाइल नेटवर्क की लचर व्यवस्था से परेशान होकर वकीलों ने रिलायंस जियो (Reliance Jio) के खिलाफ याचिका दायर कर दी है। इस मामले में दिलचस्प बात यह है कि वकीलों ने कंपनी के चेयरमैन आकाश अंबानी और मैनेजिंग डायरेक्टर ईशा अंबानी को भी पार्टी बनाया है।

फेसबुक के सबूत ने बढ़ाई मुश्किल, फिर पहुंचा मामला अदालत

याचिकाकर्ता एडवोकेट अमित राठी ने बताया कि वह लंबे समय से नेटवर्क की समस्या झेल रहे थे। उन्होंने एक वाकये का जिक्र करते हुए कहा कि एक बार कोर्ट रूम में क्लाइंट को फेसबुक के जरिए कुछ जरूरी डिजिटल सबूत दिखाने थे, लेकिन नेटवर्क गायब होने के कारण वे ऐसा नहीं कर सके। इस घटना के बाद उन्होंने कानूनी रास्ता अपनाने का फैसला किया।

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अमित राठी ने ‘लीगल सर्विसेज अथॉरिटीज एक्ट, 1987’ की धारा 22-C के तहत लोक अदालत में आवेदन किया है, जो सार्वजनिक सेवाओं में विवाद निपटान से संबंधित है।

याचिका में गिनाई गईं 4 बड़ी परेशानियां:

वकीलों ने नेटवर्क की खराबी के कारण कोर्ट के कामकाज पर पड़ रहे प्रभाव को विस्तार से बताया है:

  1. मैदान में जाकर करनी पड़ती है बात: कोर्ट बिल्डिंग और वकीलों के चैंबर के भीतर सिग्नल पूरी तरह गायब रहते हैं। मुवक्किलों से बात करने के लिए वकीलों को खुले मैदान में दौड़ना पड़ता है, जिससे समय की बर्बादी होती है।

  2. ऑनलाइन सेवाओं पर ब्रेक: अदालती कामकाज अब डिजिटल हो चुका है। इंटरनेट न चलने से न तो केस की अगली तारीख पता चल पाती है और न ही पुराने आदेशों को डाउनलोड किया जा पा रहा है।

  3. वित्तीय लेनदेन ठप: खराब नेटवर्क के चलते बैंक के OTP (ओटीपी) समय पर नहीं आते। इसके कारण स्टाम्प ड्यूटी, कोर्ट फीस और चालान का भुगतान अटक जाता है, जिससे मुकदमों की सुनवाई में देरी होती है।

  4. डेटाबेस तक पहुंच बंद: वकीलों को केस लड़ने के लिए कानूनी डेटाबेस और फाइलों को ऑनलाइन एक्सेस करना होता है, जो धीमी इंटरनेट स्पीड के कारण नामुमकिन हो गया है।

अदालत ने जारी किया समन

पानीपत की अदालत ने इस याचिका को गंभीरता से लेते हुए रिलायंस जियो के आला अधिकारियों को समन जारी कर जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 20 फरवरी को तय की गई है।

वकीलों का कहना है: “हम कंपनी को भारी बिल का भुगतान करते हैं, लेकिन सेवा के नाम पर हमें कोर्ट परिसर में भटकना पड़ता है। यह न केवल हमारे पेशे के खिलाफ है, बल्कि मुवक्किलों के न्याय पाने के अधिकार में भी बाधा है।”

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