ISRO , श्रीहरिकोटा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने वर्ष 2026 की अंतरिक्ष यात्रा की शानदार शुरुआत करते हुए सोमवार सुबह 10 बजकर 18 मिनट पर एक अहम मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से PSLV-C62/EOS-N1 रॉकेट के जरिए ‘अन्वेषा’ सैटेलाइट समेत कुल 15 उपग्रहों को अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया गया।
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इस मिशन के तहत मुख्य उपग्रह अन्वेषा के साथ 14 को-पैसेंजर सैटेलाइट भी सफलतापूर्वक अपनी निर्धारित कक्षा में स्थापित किए गए। अन्वेषा सैटेलाइट को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित किया गया है, जबकि इसके प्रक्षेपण की जिम्मेदारी ISRO ने निभाई।
खुफिया निगरानी में नई क्रांति
अन्वेषा एक अत्याधुनिक स्पाई (खुफिया) सैटेलाइट है, जिसे विशेष रूप से सुरक्षा और रक्षा जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी हाई-रिजॉल्यूशन इमेजिंग क्षमता है। यह सैटेलाइट धरती से करीब 600 किलोमीटर की ऊंचाई से भी बेहद स्पष्ट तस्वीरें लेने में सक्षम है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अन्वेषा झाड़ियों, घने जंगलों और यहां तक कि बंकरों में छिपे दुश्मनों की गतिविधियों को भी कैद कर सकता है। इससे सीमा सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी अभियानों और रणनीतिक निगरानी में भारत को बड़ी बढ़त मिलने की उम्मीद है।
सीमाओं की सुरक्षा होगी और मजबूत
अन्वेषा सैटेलाइट से प्राप्त डाटा का उपयोग सीमा क्षेत्रों की निगरानी, संवेदनशील इलाकों की मैपिंग और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए किया जाएगा। यह सैटेलाइट दिन-रात और विभिन्न मौसम परिस्थितियों में काम करने में सक्षम बताया जा रहा है, जिससे रियल-टाइम इंटेलिजेंस जुटाने में मदद मिलेगी।
PSLV की एक और सफलता
PSLV यानी पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल ने एक बार फिर अपनी विश्वसनीयता साबित की है। PSLV-C62 मिशन के तहत सभी उपग्रहों को तय समय और सटीक कक्षा में स्थापित किया गया। ISRO अधिकारियों ने मिशन की सफलता पर खुशी जताते हुए इसे भारत की अंतरिक्ष और रक्षा क्षमताओं के लिए मील का पत्थर बताया।
