जगदलपुर, 10 फरवरी 2026/ बस्तर जिले को हाथीपांव (फाइलेरिया) जैसी शारीरिक रूप से अक्षम कर देने वाली बीमारी से स्थायी मुक्ति दिलाने के लिए जिला प्रशासन ने एक व्यापक अभियान का शंखनाद कर दिया है। राज्य़ शासन के निर्देशानुसार कलेक्टर श्री आकाश छिकारा के मार्गदर्शन में तैयार की गई एक सूक्ष्म कार्ययोजना के साथ आज से इस अभियान की शुरुआत हुई। आगामी 25 फरवरी तक चलने वाले इस सघन अभियान के तहत जिले के तीन प्रमुख विकासखंडों तोकापाल, बस्तर और बकावंड में सामूहिक दवा सेवन का कार्यक्रम युद्ध स्तर पर संचालित किया जा रहा है। कलेक्टर श्री छिकारा ने इस मिशन को एक जन-आंदोलन का रूप देने की भावुक अपील की है, ताकि बस्तर का भविष्य इस दिव्यांगता से सुरक्षित रह सके।
इस अभियान की सफलता के लिए प्रशासनिक स्तर पर अभूतपूर्व समन्वय देखने को मिल रहा है, जहाँ स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ पंचायत, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास और नगरीय प्रशासन सहित कुल 13 विभाग एक साझा रणनीति पर कार्य कर रहे हैं। कार्ययोजना के अनुसार शुरुआती तीन दिनों में सभी शैक्षणिक संस्थानों और आंगनबाड़ी केंद्रों पर विशेष बूथ लगाकर दवा खिलाई जा रही है। इसके पश्चात स्वास्थ्य दलों की सक्रियता और बढ़ेगी जब वे घर-घर जाकर अपनी प्रत्यक्ष निगरानी में प्रत्येक नागरिक को दवा का सेवन सुनिश्चित कराएंगे। ताकि प्रत्यक्ष निगरानी में दवा खिलाने से ही इस बीमारी की कड़ी को तोड़ा जा सकता है।
जन-जागरूकता के लिए इस बार धरातलीय और बेहद नवीन दृष्टिकोण अपनाया गया है। ग्रामीण अंचलों में नेतृत्व को सशक्त करते हुए सरपंचों को जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे स्वयं दवा खाकर ग्रामीणों का मार्ग प्रशस्त करें, जबकि कोटवारों के माध्यम से गांव की गलियों में मुनादी कर इसके लाभों का प्रचार किया जा रहा है। विशेष रूप से शिक्षा विभाग के माध्यम से एक अनूठी पहल की गई है, जिसके तहत स्कूली छात्रों की कॉपियों पर जागरूकता संदेश अंकित कर अभिभावकों के हस्ताक्षर प्रचार प्रसार किया जा रहा है। इस कदम का उद्देश्य परिवार के हर सदस्य तक इस सुरक्षा चक्र की जानकारी पहुंचाना है। वहीं शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता वाहनों और प्रमुख चौराहों पर लगे होर्डिंग्स के माध्यम से निरंतर प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जा रहा है। सुरक्षा और स्वास्थ्य मानकों को लेकर भी प्रशासन पूरी तरह सजग है। इस दिशा में निर्देश जारी किए हैं कि दवा का सेवन किसी भी स्थिति में खाली पेट न किया जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि 2 वर्ष से कम आयु के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे व्यक्तियों को इस दवा का सेवन नहीं करना है।
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