Saturday, August 30, 2025

सेवा सहकारी समिति मर्यादित बावनकेरा उपकेंद्र चौकबेड़ा में हुआ फर्जी रकबा पंजीयन,बेच दिए लाखों रूपये की धान!

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सेवा सहकारी समिति मर्यादित बावनकेरा उपकेंद्र चौकबेड़ा में हुआ फर्जी रकबा पंजीयन,बेच दिए लाखों रूपये की धान!

महासमुंद – प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला महासमुंद तहसील बागबहरा अंतर्गत आने वाले सेवा सहकारी समिति मर्यादित बावनकेरा धान उपार्जन केंद्र चौकबेड़ा में फर्जी रकबा पंजीयन का मामला सामने आया हैं आपको बता दें धान खरीदी वर्ष 2023-24 में कंपनी जमीन को किसान ने नाम पर सीधा पंजीयन किया है चूँकि कंपनी जमीन पर कृषक उन्नति योजना का लाभ नहीं मिलना है लेकिन कंपनी जमीन का सीधा पंजीयन करने के वजह से किसान को कृषक उन्नति योजना का लाभ मिला है अब सवाल यह उठता है कि सेवा सहकारी समिति बावनकेरा उपार्जन केंद्र चौकबेड़ा में हुए फर्जी पंजीयन में समिति प्रबंधक,ऑपरेटर,या फिर तहसील माड्यूल किसके द्वारा यह फर्जी रकबा पंजीयन किया गया है?

वर्ष 2023-24 में किसान आयनलुन्कड़ पिता प्रकाश चाँद जैन किसान आई डी पर खसरा नंबर 15.590 हेक्टेयर रकबा कंपनी की जमीन हैँ फर्जी तरीके से पंजीयन किया गया हैँ जिसमे लगभग 23 लाख 25 हजार रूपये का भारी भरकम घोटाला किया गया है इस मामला को लेकर बहुत जल्द होगा कलेक्टर से शिकायत चौकबेड़ा मे गंभीर अनियमितता बरती गई है। उक्त विषय पर सम्बंधित अधिकारी फर्जी रकबा का जांच करता है तो निश्चित ही फर्जीवाड़ा सामने आएगा..अब देखना यह है कि महासमुंद जिले में इस फर्जीवाड़ा का संबधित अधिकारी क्या कार्रवाही करतें हैं।

क्या कहतें है मंडी प्रबंधक

समिति प्रबंधक से उक्त बिषय के सम्बन्ध में जानकारी चाही गई तों प्रबंधक के कहना था कि अध्यारेघा लिया होगा और ज्यादा जानकारी आपको समिति ऑपरेटर के आने के बाद जांच कर बता पाउँगा,कह कर अपना पल्ला भारी करने लगा।

क्या कहतें है मंडी ऑपरेटर –

हमारे मिडिया टीम द्वारा ज़ब मंडी ऑपरेटर से उक्त फर्जी रकबा पंजीयन के बारे से पूछा गया तो उनका कहना था कि जमीन में धान उपजाया गया था जिसके वजह से धान खरीदी किया गया है

अब सोचने वाली बात यह हैं कि धान खरीदी प्रभारी द्वारा कंपनी जमीन में निजीकरण धान खरीदी किया गया है जबकि धान खरीदी प्रभारी को बखूबी पता था कि कंपनी जमीन पर सीधा पंजीयन होने पर धान खरीदी नहीं किया जाना है बावजूद प्रभारी द्वारा धान खरीदी किया गया है जिससे किसान के नाम पर मूल एवं बोनस राशि जमा हुआ हैं। वहीं उक्त अनियमितता समिति या फिर तहसील के द्वारा जानबूझ कर किया गया है। जिससे शासन को लाखों रुपए की क्षति पहुंचाई गई है और किसान को बेजा लाभ मिला है।

यह कहता है नियम

किसी भी संस्था, प्राइवेट कंपनी, राजगामी सम्पदा, अध्यारेघा में लिया हुआ जमीन, स्कूल शाला विकास समिति की जमीन और डुबान क्षेत्र के किसान को कृषक उन्नति योजना की राशि प्रदान नहीं किया जायेगा।

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