Saturday, August 30, 2025

कुसमुण्डा खदान में डीजल चोरी का खेल, अंदर ही खपत… FIR तक नहीं, सवालों के घेरे में सिस्टम

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कोरबा। एसईसीएल की कुसमुण्डा खदान इन दिनों डीजल चोरी के मामलों को लेकर चर्चा में है। यहां चोरी का तरीका इतना चालाक है कि चोरी का माल खदान से बाहर ले जाने की जरूरत ही नहीं पड़ती। मशीनों और भारी वाहनों में चोरी का डीजल खपत कर दिया जाता है, जिससे बाहर किसी को भनक तक नहीं लगती।

शिकायत दबाने का खेल
सूत्रों के मुताबिक, डम्पर ऑपरेटर और कर्मचारी जब चोरी की लिखित शिकायत करते हैं, तो फाइल ऊपरी स्तर तक पहुंचने से पहले ही रोक दी जाती है। इस कारण कार्रवाई का रास्ता अपने आप बंद हो जाता है। जो कार्रवाई कभी-कभार होती भी है, वह सिर्फ दिखावे तक सीमित रहती है।

गिरोह और इलाकों पर पकड़
इस चोरी के नेटवर्क में नवीन कश्यप (₹5,000 इनामी) और बलगी निवासी परमेश्वर का गिरोह सक्रिय है। इनके चार प्रमुख इलाकों पर मजबूत पकड़ बताई जाती है —

  1. बरमपुर कन्वेयर बेल्ट के भीतर

  2. खमरिया पुराने पेट्रोल पंप के पीछे

  3. गेवरारोड रेलवे स्टेशन के पास

  4. खोडरी की दिशा वाला इलाका

रात में बिना नंबर प्लेट की बोलेरो और कैम्पर गाड़ियां पहुंचकर डम्परों और मशीनों से सीधे डीजल निकाल लेती हैं।

घटनाएं दर्ज, FIR गायब
हाल ही में तीन बड़े मामलों में शिकायतें दर्ज की गईं —

  • डम्पर K-928 से RBR बेल्ट के पास पूरी टंकी खाली

  • डम्पर K-941 से सतर्कता चौक के पास रात 3:40 बजे चोरी

  • डम्पर S-886 से भी डीजल गायब

लेकिन हैरानी की बात है कि किसी भी मामले में FIR दर्ज नहीं हुई। अगर कहीं कार्रवाई हुई भी, तो उसे सार्वजनिक नहीं किया गया।

अंदर ही चोरी, अंदर ही खपत
चोरी का नेटवर्क इतनी सफाई से काम करता है कि डीजल खदान की सीमा पार ही नहीं करता। न कोई गाड़ी पकड़ी जाती है, न ड्रम और न पाइपलाइन—सब कुछ अंदर ही खत्म हो जाता है।

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