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रायपुर।” गाड़ियों की कतार लगी हुई है और इन गाड़ियों को साइड स्टैंड पर लगाकर उस पर बैठे लोग आपस में कुछ फुस-फूसा रहे हैं। हमने ध्यान दिया तो समझ में आया ये लोग अज्जू के बारे में बात कर रहें हैं। एक ने बताया- “अज्जू अपने घर का इकलौता कमाने वाला था। बाप के सुसाइड करने के बाद उसी ने घर को संभाला था। एक या दो दिन पहले उसकी शादी तय हुई थी।”
जिस जगह पर खड़े होकर हम अज्जू के बारे में बात कर रहे लोगों को सून रहे थे। उससे कुछ 200 मीटर की दूरी पर अज्जू का शव रखा हुआ है। हम करीब गए तो कई सारी महिलाएं अज्जू की मां को उसके शव से दूर करने की कोशिश कर रहीं थी। अज्जू की मां ये मानने को तैयार नहीं थी कि उनका बेटा अब नहीं रहा।
शव के सिरहाने पर बैठी अज्जू की बहन बार-बार उसके माथे का चूम रही थी। मानों प्यार से उसे जगाने की कोशिश कर रही हो। इसी बीच एक व्यक्ति ने कहा- “अब चलना चाहिए, अंतिम संस्कार का वक्त हो रहा है।” कुछ पुरुषों ने आपस में बातचीत की और अज्जू की अर्थी को झटके से कांधे पर उठा लिया।