नई दिल्ली: चीन करेंसी प्रिंटिंग का नया हब बनता जा रहा है। एशियाई देशों के कई पड़ोसी राष्ट्र अब अपने करेंसी नोटों की प्रिंटिंग के लिए चीन का रुख कर रहे हैं। हाल ही में नेपाल के केंद्रीय बैंक ने 1000 रुपए के 43 करोड़ नोटों की प्रिंटिंग के लिए टेंडर जारी किया, जिसे चीन की एक कंपनी ने जीत लिया।
भारत के पड़ोसी देशों जैसे नेपाल, श्रीलंका, थाईलैंड और बांग्लादेश ने भी अपनी करेंसी नोटों की प्रिंटिंग के लिए चीन को प्राथमिकता देना शुरू कर दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में चीन एशियाई देशों के लिए करेंसी प्रिंटिंग का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है।
इस बदलाव का असर अमेरिका और ब्रिटेन के प्रिंटिंग मार्केट पर भी पड़ रहा है। अब इन देशों की कंपनियों को एशियाई देशों से प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि चीन की यह बढ़ती भूमिका उसकी वैश्विक आर्थिक और वित्तीय पकड़ को और मजबूत करेगी।
चीन की करेंसी प्रिंटिंग उद्योग में तेजी से बढ़ती पकड़ से न केवल एशियाई देशों को लागत में लाभ मिल रहा है, बल्कि उन्हें उच्च गुणवत्ता वाले नोट और सुरक्षित मुद्रा प्रिंटिंग तकनीक भी मिल रही है।
