Monday, February 16, 2026

राखड़ डंपिंग से बच्चों का दम घोंटू सफर, प्रशासन की चुप्पी से ग्रामीणों में भारी आक्रोश

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सक्ती / सक्ती से लगे ग्राम पंचायत मसनियाकला के मसनियाखुर्द में अवैध राखड़ डंपिंग का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। शासन-प्रशासन की नाक के नीचे बालक छात्रावास से लगी हुई जमीन पर 1.5 लाख मैट्रिक टन राखड़ का पहाड़ खड़ा कर दिया गया है, जिससे न केवल पर्यावरण बल्कि आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा संचालित बालक छात्रावास के मासूम बच्चों के स्वास्थ्य को भी दांव पर लगा दिया है।


छात्रावास के बच्चे ‘जहरीली हवा’ के साये में
छात्रावास से बिल्कुल सटी जमीन पर भारी मात्रा में राखड़ डंप किया गया है। गर्मी की शुरुआत होते ही तेज हवाओं के कारण राखड़ उड़कर सीधे छात्रावास के कमरों और परिसर में पहुंच रही है। इससे बच्चों को सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन और त्वचा संबंधी रोगों का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत के कुछ रसूखदारों की मिलीभगत से इस अवैध कार्य को अंजाम दिया गया है।

प्रशासनिक उदासीनता और वन विभाग का संशय

हैरानी की बात यह है कि मसनिया ग्राम पंचायत में क्षेत्रीय सांसद भी निवास करती हैं, इसके बावजूद इस समस्या की ओर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है। यह क्षेत्र पहाड़ी होने के कारण जिस जमीन पर राखड़ पाटा गया है, उसके वन विभाग के अंतर्गत होने की भी आशंका जताई जा रही है।

*हमने इस संबंध में कलेक्टर से
भी लिखित शिकायत की थी,
लेकिन महीनों बीत जाने के बाद
भी धरातल पर कोई ठोस
कार्यवाही नहीं हुई है।ऐसा
लगता है जैसे प्रशासन किसी
बड़े हादसे का इंतजार कर रहा
है।*

( ग्रामीण संजय लहरे)

आने वाले खतरे: जल और वायु प्रदूषण का दोहरा वार

आगामी दिनों में यह समस्या और भी भयावह रूप ले सकती है डंपिंग स्थल के पास ही एक तालाब स्थित है। बरसात के मौसम में राखड़ बहकर सीधे तालाब में मिलेगी, जिससे निस्तारी करने वाले ग्रामीणों में गंभीर बीमारियां फैलना तय है। राखड़ में मौजूद भारी धातुएं जमीन के अंदर रिसकर पानी को जहरीला बना सकती हैं। लगातार राखड़ के संपर्क में रहने से सिलिकोसिस जैसी लाइलाज फेफड़ों की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है।

सवालों के घेरे में ग्राम पंचायत
ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि पंचायत की मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी मात्रा में राखड़ डालना असंभव है। अब सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन बच्चों के भविष्य और ग्रामीणों के स्वास्थ्य की रक्षा करेगा, या फिर राखड़ माफियाओं के आगे नतमस्तक रहेगा?

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