नई दिल्ली। आज देशभर में बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक होलिका दहन मनाया जा रहा है। हालांकि, इस साल यह पर्व एक दुर्लभ खगोलीय घटना का गवाह बन रहा है। आज साल का पहला चंद्र ग्रहण लग रहा है, जो भारत के कई हिस्सों में दिखाई देगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के दौरान सूतक काल प्रभावी रहता है, जिसमें विशेषकर गर्भवती महिलाओं को अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
ग्रहण और सूतक का समय (IST)
ज्योतिष गणना के अनुसार, चंद्र ग्रहण की शुरुआत आज दोपहर में हो रही है, लेकिन भारत में यह चंद्रोदय के साथ शाम को दृश्यमान होगा।
ग्रहण का आरंभ: दोपहर 03:20 बजे
ग्रहण का समापन: शाम 06:48 बजे
सूतक काल: सुबह 09:20 बजे (9 घंटे पूर्व) से शुरू हो चुका है और ग्रहण समाप्ति तक रहेगा।
गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष सावधानियां
धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण की नकारात्मक किरणें गर्भस्थ शिशु पर प्रभाव डाल सकती हैं। इसलिए महिलाएं इन नियमों का पालन करें:
घर से बाहर न निकलें: ग्रहण के दौरान सीधी रोशनी से बचने के लिए महिलाओं को घर के अंदर ही रहने की सलाह दी जाती है।
धारदार वस्तुओं का परहेज: चाकू, कैंची, सुई या किसी भी नुकीली वस्तु का प्रयोग न करें। माना जाता है कि इससे शिशु के अंगों पर बुरा असर पड़ सकता है।
सोने से बचें: ग्रहण काल के दौरान सोना वर्जित माना गया है। इस समय मंत्रों का जाप या भगवान का ध्यान करना शुभ होता है।
भोजन और पानी: सूतक काल शुरू होने से पहले ही खाने-पीने की चीजों में तुलसी के पत्ते डाल दें। ग्रहण के दौरान भोजन करने से बचना चाहिए।
ग्रहण के बाद स्नान: ग्रहण समाप्त होने के बाद गर्भवती महिलाओं को शुद्ध जल से स्नान करना चाहिए ताकि नकारात्मक ऊर्जा दूर हो सके।
होलिका दहन पर प्रभाव
ग्रहण के कारण इस बार होलिका दहन के समय में भी बदलाव देखा जा रहा है। विद्वानों के अनुसार, ग्रहण और सूतक काल समाप्त होने के बाद यानी शाम 06:48 बजे के बाद ही होलिका दहन करना शास्त्र सम्मत और शुभ होगा।
