रायपुर | छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान शुक्रवार को एक बेहद भावुक और ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला। राज्य शासन की पुनर्वास नीति के तहत बंदूक छोड़कर शांति का मार्ग चुनने वाले 120 पूर्व नक्सलियों ने विधानसभा की दर्शक दीर्घा में बैठकर सदन की कार्यवाही का प्रत्यक्ष अनुभव किया।
आसंदी से मिलीं शुभकामनाएँ
जैसे ही सदन को इन विशेष अतिथियों की उपस्थिति की जानकारी दी गई, विधानसभा अध्यक्ष (आसंदी) ने आधिकारिक रूप से उनका स्वागत किया। अध्यक्ष ने समाज की मुख्यधारा में लौटने के उनके साहसी निर्णय की सराहना की और उनके उज्ज्वल व शांतिपूर्ण भविष्य के लिए पूरे सदन की ओर से शुभकामनाएँ दीं। सदन में मौजूद सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों ने मेज थपथपाकर इस पहल का स्वागत किया।
जंगल की ‘अदालत’ से लोकतंत्र की ‘पंचायत’ तक
कभी छिपकर रहने वाले और लोकतांत्रिक व्यवस्था का विरोध करने वाले इन लोगों के लिए यह अनुभव बिल्कुल नया था।
कार्यवाही का अवलोकन: पूर्व नक्सलियों ने देखा कि कैसे जन प्रतिनिधि जनता के मुद्दों को उठाते हैं और कानून निर्माण की प्रक्रिया क्या होती है।
लोकतंत्र पर भरोसा: इस दौरे का मुख्य उद्देश्य इन युवाओं के मन में लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति विश्वास जगाना और उन्हें यह समझाना था कि बदलाव का असली रास्ता बुलेट (गोली) नहीं, बल्कि बैलेट (वोट) और संवाद है।
पुनर्वास नीति का विस्तार
गृह मंत्री विजय शर्मा की देखरेख में चल रहे इस विशेष अभियान के तहत पूर्व नक्सलियों को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि ‘एक्सपोज़र विज़िट’ भी कराई जा रही है।
“यह केवल एक दौरा नहीं है, बल्कि यह संदेश है कि जो भी हिंसा का रास्ता छोड़ेगा, उसे शासन और प्रशासन पूरे सम्मान के साथ गले लगाएगा। विधानसभा की कार्यवाही दिखाकर हम उन्हें अपनी लोकतांत्रिक शक्ति का अहसास कराना चाहते हैं।” — विभागीय अधिकारी
