नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के लाल किला के पास हुए धमाके ने सुरक्षा एजेंसियों को हाई-अलर्ट पर ला दिया है। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि i20 कार में हुए इस विस्फोट में जिस विस्फोटक का इस्तेमाल हुआ, वह बेहद खतरनाक और कुख्यात ट्राईएसीटोन ट्राईपेरऑक्साइड (TATP) हो सकता है, जिसे आतंकवादी समूहों के बीच ‘मदर ऑफ शैतान’ के नाम से जाना जाता है।
जांच एजेंसियों को TATP पर शक क्यों?
जांच अधिकारियों के अनुसार, TATP इतना संवेदनशील और घातक विस्फोटक है कि यह हल्की गर्मी या मामूली झटके से भी फट सकता है। इसकी अस्थिर संरचना इसे दुनिया के सबसे खतरनाक विस्फोटकों में शुमार करती है। कई अंतरराष्ट्रीय आतंकी हमलों में इसका इस्तेमाल हो चुका है, जिसके चलते भारतीय सुरक्षा एजेंसियां विशेष सतर्कता बरत रही हैं।
फॉरेंसिक टीम जुटी सैंपल की जांच में
फिलहाल फॉरेंसिक विशेषज्ञ उस सामग्री के नमूनों की जांच में जुटे हैं जो कार के अवशेषों से बरामद हुई है। अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि धमाके के पीछे वास्तव में TATP का इस्तेमाल किया गया था या किसी और उच्च-विस्फोटक रसायन का।
अधिकारियों का कहना है कि जब तक फॉरेंसिक रिपोर्ट नहीं आती, तब तक विस्फोटक की पुष्टि नहीं की जा सकती। हालांकि प्राथमिक संकेत TATP जैसी सामग्री की ओर इशारा कर रहे हैं।
दिल्ली में सुरक्षा कड़ी
धमाके के बाद लाल किला और आसपास के इलाकों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। पुलिस ने आस-पास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले हैं और कार के मालिक तथा संभावित संदिग्धों की जानकारी जुटाई जा रही है।
TATP क्यों है इतना खतरनाक?
मामूली तापमान बढ़ने से भी विस्फोट
तैयार करना आसान लेकिन बेहद अस्थिर
कई बड़े अंतरराष्ट्रीय आतंकी हमलों में इस्तेमाल
बचाव दल और जांच टीमें भी इसकी चपेट में आ सकती हैं
आगे की जांच जारी
जांच एजेंसियां इस धमाके को किसी बड़ी साजिश का हिस्सा मानकर काम कर रही हैं। फॉरेंसिक रिपोर्ट के बाद ही यह साफ होगा कि धमाके का असली कारण क्या था और इसके पीछे कौन लोग शामिल हो सकते हैं।
