जगदलपुर, 30 जनवरी 2026/ भारत के स्वतंत्रता संग्राम के अमर शहीदों की स्मृति में आज समूचा बस्तर जिला कृतज्ञता के भाव से नतमस्तक हो उठा। शुक्रवार को सुबह जैसे ही घड़ी की सुइयां 11 पर पहुंचीं, जिले में राष्ट्रभक्ति और अनुशासन का एक ऐसा विहंगम दृश्य उपस्थित हुआ, जिसने हर देखने वाले के हृदय को गर्व से भर दिया। वीर सपूतों के सम्मान में शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक, जीवन की गति जैसे एक ही पल में ठहर गई। व्यस्त चौराहों से लेकर शांत गलियों तक, हर जगह केवल मौन और असीम श्रद्धा का भाव नजर आया।
प्रशासन द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के तहत सुबह 10:59 बजे चेतावनी सायरन गूंजते ही नागरिकों ने अपनी गतिविधियां रोकनी शुरू कर दी थीं। ठीक 11:00 बजे मुख्य सायरन की आवाज के साथ ही पूरे बस्तर में गहरा सन्नाटा पसर गया। सड़कों पर फर्राटा भरते वाहनों के पहिए थम गए, दफ्तरों में चलती कलमें रुक गईं और बाजारों का कोलाहल पूरी तरह शांत हो गया। क्या खास और क्या आम, रिक्शा चालकों से लेकर व्यापारियों और राहगीरों तक, हर कोई अपनी जगह पर स्थिर खड़ा होकर देश के लिए प्राण न्योछावर करने वाले वीरों को नमन करता नजर आया। 11:02 बजे ‘ऑल क्लियर’ सायरन बजने के बाद ही जनजीवन ने पुनः अपनी रफ्तार पकड़ी और लोगों ने अपने कार्य आरंभ किए।
कमिश्नर श्री डोमन सिंह सहित कार्यालय के सभी अधिकारी कर्मचारियों ने कमिश्नर कार्यालय के सभागार में दो मिनट का मौन रखकर शहीदों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की। वहीं
कलेक्टोरेट स्थित गांधी उद्यान में भी एक भावपूर्ण वातावरण देखने को मिला, जहां कलेक्टर श्री आकाश छिकारा, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री प्रतीक जैन, अपर कलेक्टर श्री सीपी बघेल सहित अधिकारी कर्मचारियों ने महात्मा गांधी और अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए’ के सामूहिक पाठ ने माहौल को और अधिक भक्तिमय बना दिया, जहां उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों ने मौन रहकर शहीदों के बलिदान को याद किया।
इस वर्ष का आयोजन इसलिए भी विशेष रहा क्योंकि यह महज एक सरकारी रस्म अदायगी न रहकर एक जन-अभियान में परिवर्तित हो गया। प्रशासन की अपील का व्यापक असर आम जनता पर दिखाई दिया। जहां पिछले वर्षों में लोग अपनी व्यस्तता के कारण अक्सर रुकते नहीं थे और आयोजन औपचारिकता मात्र रह जाता था, वहीं आज स्वेच्छा से अनुशासन का परिचय देकर बस्तरवासियों ने यह सिद्ध कर दिया कि शहीदों का बलिदान आज भी उनके जनमानस में सर्वोपरि है।
इसके साथ ही, नई पीढ़ी तक शहीदों की गाथा पहुँचाने के उद्देश्य से जिले के शैक्षणिक संस्थानों में भी विशेष उत्साह देखा गया। स्कूलों और कॉलेजों में हाइब्रिड तथा ऑनलाइन मोड के माध्यम से विशेष व्याख्यान और वार्ताओं का आयोजन हुआ, जहाँ युवाओं को स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के त्याग और राष्ट्रीय एकता के महत्व से अवगत कराया गया। कुल मिलाकर, आज बस्तर ने एकजुटता की जो मिसाल पेश की, उसने शहीद दिवस की सार्थकता को सिद्ध कर दिया है। दो मिनट के इस मौन ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि देश की आजादी के लिए मिट जाने वालों को बस्तर कभी नहीं भुलाएगा।
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