Tuesday, February 24, 2026

मध्यान भोजन में मिलावटी एवं कीटाणु युक्त भोजन परोसा गया

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छत्तीसगढ़ राज्य के जांजगीर जिला के अंतर्गत अकलतरा विकासखंड के झलमला ग्राम में शासकीय प्राथमिक शाला स्कूल टाडपारा के स्कूल में मध्यान भोजन में कीटाणु युक्त भोजन दिया गया यह मध्यान भोजन को दिया गया समूहों के माध्यम से निर्माण कार्य करने के पश्चात संबंधित स्कूल के प्रधान पाठक के द्वारा इस पर विशेष कार्यवाही नहीं किया गया जबकि जितने भी स्कूलों में संचालित है मध्यान भोजन बच्चों के लिए जो दिया जाता है उसे गुणवत्ता की निगरानी के लिए स्कूल के प्रधान पाठक को एवं शिक्षकों को नियुक्त किया गया है उसके बावजूद भी उन शिक्षकों के द्वारा किसी भी प्रकार की कार्यवाही नहीं किया गया है यह मामला पत्रकार राकेश कुमार साहू को विदित हुई तो यह समाचार जारी किया गया है कि जिस स्कूल में मध्यान भोजन की वितरण की गई है बच्चों को खाने के लिए वह कीटाणु युक्त एवं गुणवत्ता विहीन भोजन है किसी भी प्रकार की सफाई व्यवस्था नहीं है सफाई के नाम पर ठेंगा है इस तरह से मामला आया है प्रकाश में जो की स्वच्छ भारत मिशन की धज्जियां उड़ा रहे हैं संबंधित स्कूल के प्रधान पाठक एवं मध्यान भोजन के बनाने वाले समूह के द्वारा ।

इस तरह का मामला शासकीय कन्या पूर्व माध्यमिक शाला नरियारा में किया गया था तो तत्काल अधिकारियों की छापेमारी कार्यवाही करने के पश्चात एवं मीडिया में प्रकाशित खबर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में प्रसारित खबर को संज्ञान लेते हुए संबंधित मध्यान भोजन बनाने वाले महिला स्वास्थ्य सहायता समूह को तत्काल निलंबित किया गया है अगर इस तरह से हर जगह पर हर स्कूल में मध्यान भोजन में गड़बड़ी मिलती है जिसकी मामला मीडिया के माध्यम से सार्वजनिक हो जाती है तो तत्काल कार्यवाही किया जाता है महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि झलमला के जिस स्कूल में यह भोजन की व्यवस्था की गई है वहां पर झलमला ग्राम पंचायत के पच की घरवाली मध्यान भोजन की प्रभारी है शासन को यह जानकारी होना चाहिए कि किसी भी प्रकार के पच जनप्रतिनिधि के घरवाली को अगर जो समूह में है तो उस समूह को मध्यान भोजन बनाने का वितरण करने का अधिकार ही नहीं देना चाहिए अगर दिया गया है तो उसभोजन बनाने वाले ऊपर निगरानी समिति गठित होनी चाहिए अगर साल विकास समिति का अध्यक्ष है किसी भी स्कूल में तो साला विकास समिति के अध्यक्ष को सतत मॉनिटरिंग करना चाहिए अगर जो मॉनिटरिंग नहीं करता है तो उसके विरुद्ध शासन को कार्यवाही करने का अधिकार है।

जानकारी यह भी है कि बच्चों के द्वारा कीड़ा को खाने से निकाल कर खाया गया है अगर हो सके तो यह फूड प्वाइजनिंग का शिकार होने की संभावना है बच्चों की बीमारी होने की संभावना सबसे अधिक है इस तरह से यह दूसरा मामला उजागर हो चुका है जहां गुणवत्ता विहीन भोजन खाने को दिया जाता है।
इसी कड़ी में यह भी संज्ञान है कि स्कूल के प्रधान पाठक को निगरानी करना चाहिए मगर उनको तो निगरानी करने की जगह मोबाइल चलाने से फुर्सत नहीं मिलता तो वह क्या करेंगे केवल मोबाइल चलाते रहते हैं मध्यान भोजन जाए भाड़ में हम तो रहे मस्त बच्चे जाए बीमारी के चपेट में और फूड वायजनिंग का शिकार होने के पश्चात मर जाए बच्चे ऐसा आजकल के प्रधान पाठक होते हैं

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