नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में प्रदूषण का स्तर लगातार गंभीर होता जा रहा है। वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) हर रोज खतरनाक श्रेणी में दर्ज किया जा रहा है, जिससे लोगों को सांस लेने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसी बढ़ते प्रदूषण संकट को देखते हुए अब संसद के सत्रों को दिल्ली से बाहर आयोजित करने की मांग उठने लगी है।
सांसद ने प्रदूषण को बताया ‘मानव निर्मित आपदा’
बीजू जनता दल (बीजद) के राज्यसभा सांसद मानस रंजन मंगराज ने गुरुवार को इस मुद्दे को गंभीरता से उठाते हुए दिल्ली की प्रदूषण स्थिति को “मानव निर्मित आपदा” बताया। उन्होंने कहा कि संसद भवन देश की राजधानी में स्थित होने के कारण लगातार प्रदूषित हवा में कार्यवाही करना सांसदों और कर्मचारियों के स्वास्थ्य के लिए जोखिमपूर्ण है।
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सत्र को दूसरी जगह शिफ्ट करने का प्रस्ताव
सांसद मंगराज ने सरकार से अपील की कि जब तक दिल्ली की हवा सुरक्षित स्तर पर नहीं आती, तब तक संसद का शीतकालीन और बजट सत्र किसी अन्य शहर में आयोजित किया जाए। उनका कहना है कि दिल्ली का प्रदूषण सिर्फ आम जनता ही नहीं, बल्कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे में काम करने वाले जनप्रतिनिधियों को भी प्रभावित कर रहा है।
लोग तरस रहे साफ हवा के लिए
दिल्ली के कई इलाकों में सांस लेना तक मुश्किल हो रहा है। यहां की हवा में प्रदूषक तत्वों की मात्रा लगातार बढ़ रही है, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। प्रदूषण नियंत्रण उपायों के बावजूद हालात में खास सुधार नहीं दिख रहा है।
संसद सत्र को शिफ्ट करने पर शुरू हुई चर्चा
सांसद के बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस शुरू हो गई है कि क्या वास्तव में संसद सत्रों को दिल्ली से बाहर ले जाना एक व्यवहारिक समाधान हो सकता है। हालांकि, सरकार की ओर से इस पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
दिल्ली सरकार और केंद्र पर सवाल
दिल्ली में प्रदूषण हर साल की समस्या बन चुकी है। ऐसे में विपक्ष और विशेषज्ञ दोनों ही केंद्र और दिल्ली सरकार पर सवाल उठाते रहे हैं कि क्यों अब तक स्थायी समाधान नहीं निकल पाया।
