Wednesday, February 4, 2026

भृत्य को प्रताड़ित कर रिश्वत की मांग, जिला शिक्षा कार्यालय के कर्मचारी के खिलाफ कलेक्ट्रेट में शिकायत

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वैसे तो व्यवहारिक तौर पर सभी को पता है कि जिलों में शिक्षा नितियों को पालान कराने के लिए जिला शिक्षा कार्यालय तैनात रहता है लेकिन यह बात किसी किसी को ही पता होगी कि भ्रष्टाचार का माल बटोरने में भी जिला शिक्षा कार्यालय के कर्मचारी सबसे आगे की लाइन में झोला टांगे तैनात खड़े रहते हैं. हालिया मामला जांजगीर चांपा जिले के जिला शिक्षा कार्यालय का है, यहीं का एक कर्माचारी किसलेय कुमार घृतलहरे पर ग्राम सिवनी के उच्चतर माध्यमिक विद्यालय(सिवनी) में पदस्थ एक भृत्य युगेंद्र कुर्रे ने रिश्वत मांगने का आरोप लगाया है, भृत्य ने पहले तो डर की वजह से किसलेय घृतलहरे को नकदी 55 हजार रुपये दिए और बैंकिंग साइट फोन-पे के माध्यम से 2000 (दो हजार) रुपये दिए-

लेकिन DEO दफ्तर के कर्मचारी किसलेय कुमार घृतलहरे का लालच यहीं खत्म नहीं हुआ उसने दोबारा भृत्य युगेंद्र कुर्रे से रिश्वत की मांग की और पैसे ना देने पर भृत्य युगेंद्र को अटैच करने की धमकी भी दी जिससे तंग आकर युगेंद्र ने जांजगीर कलेक्ट्रेट में लिखित शिकायत दर्ज कराई-

जब किसलेय को शिकायत की जानकारी हुई और इस मुद्दे पर जांच आगे बढ़ने लगी तो किसलेय और एक अन्य आधिकारी द्वारा युगेंद्र कुर्रे पर शिकायत वापस लेने का दवाब बनाया गया,

विभागीय डर की वजह से युगेंद्र ने शिकायत वापस लेने की बात पर हामी भर दी शिकायत वापसी के लिए उससे लेटर भी लिखवाया गया.
Video: युगेंद्र कुर्रे शिकायतकर्ता

जब इस पूरे मामले पर जिला शिक्षा अधिकारी से बात की गई, तो उन्होंने जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। यह घटना विभागीय स्तर पर घूसखोरी और दबाव की संस्कृति को उजागर करती है, जहां निचले स्तर के कर्मचारी भी शोषण का शिकार हो रहे हैं।

यह मामला छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी को दर्शाता है। भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की सरकारी नीति के बावजूद ऐसे आरोप उठना चिंताजनक है। प्रशासन को स्वतंत्र जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि आम कर्मचारियों का मनोबल टूटे नहीं और विभाग की छवि सुधरे। और किसलय बनाम युगेंद्र मामले में देखना यह है कि जांजगीर चांपा जिले के शिक्षा विभाग के बड़े अधिकारी भृत्य युगेंद्र को इंसाफ दिलाते हैं या फिर मलाई मिठाई बांट कर रिश्वत मांगने वाले आरोपी को बाइज्जत बरी कर देते हैं. क्योंकि ऐसे मामलों में अक्सर देखा जाता है नौकरी पर संकट दिखा कर छोटे कर्मचारियों का मुंह बंद करा दिया जाता है.

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