शीतला अष्टमी पर क्या करें: बासी भोजन और शुद्धता का नियम
शीतला माता की पूजा में शुद्धता का विशेष महत्व है। इस दिन किए जाने वाले मुख्य कार्य नीचे दिए गए हैं:
- बासी भोजन का भोग: माता शीतला को एक दिन पहले बना हुआ भोजन (जैसे मीठे चावल, राबड़ी या पुए) अर्पित करें।
- ठंडे जल से स्नान: अष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर ठंडे जल से स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- नीम के पत्ते: पूजा के दौरान नीम के पत्तों का प्रयोग करें, क्योंकि नीम को आरोग्य और मां शीतला का प्रतीक माना जाता है।
- दान का महत्व: पूजा के बाद बचा हुआ भोजन गरीबों या पशु-पक्षियों को खिलाना शुभ माना जाता है।
क्या न करें: इन गलतियों से नाराज हो सकती हैं माता
शास्त्रों के अनुसार, शीतला अष्टमी के दिन कुछ कार्यों की सख्त मनाही है:
- चूल्हा न जलाएं: इस दिन घर में ताजा भोजन नहीं बनाना चाहिए। रसोई घर में अग्नि जलाना वर्जित माना गया है।
- गर्म भोजन का परहेज: इस दिन परिवार के किसी भी सदस्य को गर्म भोजन या गर्म पानी का सेवन नहीं करना चाहिए।
- सिलाई और कटाई: इस तिथि पर सुई में धागा डालना या सिलाई-बुनाई करना अशुभ माना जाता है।
- तामसिक भोजन: घर में मांस, मदिरा या लहसुन-प्याज का प्रयोग बिल्कुल न करें।
“शीतला अष्टमी का पर्व ऋतु परिवर्तन का संकेत है। इस समय से गर्मी बढ़ने लगती है, इसलिए बासी और ठंडे भोजन के जरिए शरीर को तापमान सहने के लिए तैयार किया जाता है। धार्मिक दृष्टि से यह आरोग्य की देवी की सेवा है।”
— पंडित के.के. शास्त्री, ज्योतिषाचार्य
दिल्ली और उत्तर भारत के बाजारों में अष्टमी से एक दिन पहले यानी 10 मार्च को विशेष रौनक रहेगी। हलवाई की दुकानों पर दही-बड़े और गुझिया की मांग बढ़ जाती है। मंदिर समितियों ने शीतला माता मंदिरों में विशेष दर्शन की व्यवस्था की है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि बासी भोजन का सेवन करते समय उसकी स्वच्छता का ध्यान रखें, विशेषकर बदलते मौसम में संक्रमण से बचने के लिए। 11 मार्च को मंदिरों के पास भारी भीड़ रहने की संभावना है, इसलिए स्थानीय पुलिस ने यातायात डायवर्जन के निर्देश दिए हैं।
