रायपुर: छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। ताजा मामला उद्योग विभाग के अंतर्गत बायलर इंस्पेक्टर (Boiler Inspector) के पद पर की गई नियुक्ति से जुड़ा है। आरोप है कि आयोग ने इस भर्ती में न केवल नियमों की धज्जी उड़ाई, बल्कि बिलासपुर हाईकोर्ट द्वारा दिए गए स्पष्ट निर्देशों की भी अनदेखी की है।
इस मामले को लेकर भाजपा नेता गौरीशंकर श्रीवास ने राज्यपाल रमेन डेका से मुलाकात कर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है और पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
क्या है पूरा विवाद?
शिकायत के अनुसार, बायलर इंस्पेक्टर के पद पर जिस अभ्यर्थी का चयन किया गया है, उसकी अनिवार्य शैक्षणिक योग्यता और कार्य अनुभव पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
योग्यता पर सवाल: भाजपा नेता का दावा है कि चयनित उम्मीदवार विज्ञापन में निर्धारित मानदंडों को पूरा नहीं करता था।
हाईकोर्ट के निर्देश की अवहेलना: मामले में यह भी आरोप लगाया गया है कि हाईकोर्ट ने पूर्व में इस भर्ती प्रक्रिया को लेकर कुछ दिशा-निर्देश दिए थे, लेकिन आयोग ने उन्हें दरकिनार करते हुए आनन-फानन में नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया।
राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग
गौरीशंकर श्रीवास ने राज्यपाल को सौंपे ज्ञापन में कहा कि CGPSC की कार्यप्रणाली पहले से ही सवालों के घेरे में रही है (विशेषकर 2021 भर्ती घोटाले के बाद), और अब बायलर इंस्पेक्टर भर्ती में हुई यह गड़बड़ी योग्य उम्मीदवारों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने मांग की है कि:
इस नियुक्ति को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए।
चयन प्रक्रिया की फाइलें राजभवन तलब की जाएं।
दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
सफेदपोशों और अधिकारियों के बीच सांठगांठ का आरोप
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह नियुक्ति किसी प्रभावशाली व्यक्ति के संरक्षण में की गई है। श्रीवास ने मीडिया से चर्चा में कहा, “आयोग अब संवैधानिक संस्था कम और भ्रष्टाचार का अड्डा ज्यादा नजर आ रहा है। जब हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए थे, तो उनकी अवहेलना करना सीधे तौर पर अदालत की अवमानना है।”
