क्या है SIM Binding नियम और क्यों पड़ा सरकार को सख्त होना?
केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने साफ किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा और साइबर धोखाधड़ी (Cyber Fraud) को रोकने के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य है। नए नियमों के तहत, अब मैसेजिंग ऐप्स को डिवाइस में मौजूद भौतिक सिम कार्ड से ‘बाइंड’ यानी लिंक करना होगा। अगर फोन में वह सिम कार्ड मौजूद नहीं है जिस पर अकाउंट बना है, तो ऐप काम करना बंद कर देगा। सरकार का मानना है कि इससे उन जालसाजों पर लगाम लगेगी जो एक नंबर से अकाउंट बनाकर सिम कार्ड फेंक देते हैं और फिर वाई-फाई के जरिए विदेशों या दूर-दराज के इलाकों से ठगी करते हैं।
इन ऐप्स पर गिरेगी गाज: पूरी लिस्ट
नए नियमों के दायरे में सिर्फ WhatsApp ही नहीं, बल्कि लगभग सभी प्रमुख मैसेजिंग और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म आएंगे:
- WhatsApp, Telegram और Signal
- Snapchat और ShareChat
- JioChat, Arattai और Josh
आम यूजर पर क्या होगा असर?
1 मार्च से आपकी डिजिटल लाइफ में ये 3 बड़े बदलाव दिखने वाले हैं:
- No SIM, No Chat: अगर आपने फोन से सिम निकाल दी है, तो मैसेजिंग ऐप तुरंत लॉग-आउट या ब्लॉक हो जाएगा।
- वेब वर्जन पर पाबंदी: WhatsApp Web या डेस्कटॉप वर्जन इस्तेमाल करने वालों को अब हर 6 घंटे में दोबारा लॉग-इन (Re-authenticate) करना होगा। पहले यह हफ्तों तक लॉग-इन रहता था।
- Wi-Fi ओनली डिवाइस: ऐसे टैबलेट या फोन जिनमें सिम स्लॉट नहीं है, उन पर ये ऐप्स चलाने में तकनीकी दिक्कतें आ सकती हैं।
“राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता। सिम बाइंडिंग नियम डिजिटल धोखाधड़ी को रोकने के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करेंगे। हमने कंपनियों को पर्याप्त समय दिया है और अब डेडलाइन नहीं बढ़ेगी।”
— ज्योतिरादित्य सिंधिया, केंद्रीय संचार मंत्री
अचानक संपर्क टूटने से बचने के लिए नागरिक ये कदम उठाएं:
1. अपना प्राइमरी सिम कार्ड उसी फोन में रखें जिसमें आप मुख्य मैसेजिंग ऐप्स चलाते हैं।
2. अगर आप WhatsApp Web का उपयोग ऑफिस के काम के लिए करते हैं, तो बार-बार होने वाले लॉग-आउट के लिए तैयार रहें।
3. 28 फरवरी की रात तक अपने सभी जरूरी ऐप्स को अपडेट कर लें ताकि वे नए सिक्योरिटी प्रोटोकॉल के साथ सिंक हो सकें।
