कोरबा :- तहसीलदार कोरबा ने वायरल समाचार “गांव के कोने से जमीन ने भरी उड़ान शासकीय जमीन पर की लैंडिंग” पर संज्ञान लेते हुए राजस्व निरीक्षक से जांच प्रतिवेदन मंगवाया है जिस पर राजस्व निरीक्षक ने संबंधित जमीन के किसान तथा आसपास लगे जमीन मालिकों को दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने को कहा गया है!
पूरा मामला कोरबा तहसील के ग्राम दादर खुर्द से जुड़ा है …..
ग्राम दादरखुर्द प ह नं 21 रा नि मं दादरखुर्द तहसील व जिला कोरबा के कास्तकार हरिहर राव मगर पिता खेमंत राव मगर के नाम पर मसाहती पुराना खसरा नं 206 रकबा 1.84 एकड़ भूमि दर्ज रहा है बंदोबस्त पश्चात उपरोक्त मसाहती खसरा नं की भूमि का नवीन खसरा नं 1567,1570 एवं 1572 है जो ग्राम दादरखुर्द के बोईर मुड़ा खार कुम्हार पारा अपने वास्तविक मूल स्थान पर स्थित है जिसे काश्तकार हरिहर राव मगर और उसके रिश्तेदार साला नरोत्तम राव घाड़गे द्वारा बेजा आर्थिक फायदा के लिए उस जमीन को खरमोरा दादरखुर्द मुख्य मार्ग स्थित बेशकीमती शासकीय जमीन खसरा नं 273 एवं 274 जो मूल स्थान से लगभग 2 किलोमीटर दूर खरमोरा बस्ती सरहद से लगी हुई है जिसमें स्थापित करवाया गया है।
मसाहती खसरा नं 206 रकबा 1.84 एकड़ जमीन पूर्व में हीराबाई जौजे गोबिंद के नाम पर दर्ज रहा है नामांतरण क्रमांक 03 आदेश दिनांक 26/01/1995 के अनुसार उपरोक्त भूमि लक्ष्मण राव पिता नारायण राव के नाम पर दर्ज हुआ है ग्राम दादरखुर्द के बंदोबस्त के दौरान वह जमीन लक्ष्मण राव के दामाद और नरोत्तम राव के जीजा हरिहर राव मगर पिता खेमंत राव मगर के नाम दर्ज हुआ है जिसका बंदोबस्त पश्चात नवीन खसरा नंबर 1566,1570 एवं 1572 है जिसे काश्तकार हरिहर राव मगर अपने द्वारा बेजा आर्थिक फायदा के लिए अपने अंदर की जमीन को तत्कालीन राजस्व निरीक्षक और अनुविभागीय अधिकारी राजस्व कोरबा से सांठगांठ करते हुए योजना बनाकर छ ग भू रा सं की धारा 89 के तहत के उस जमीन को खरमोरा दादरखुर्द मुख्य मार्ग पर शासकीय खसरा नं 273 एवं 274 पर स्थापित करवाया गया।
कौन है इसका मास्टरमाइंड, किसने बुना है सरकारी जमीन हड़पने का जाल….
जानकारी और सूत्रों के अनुसार सरकारी जमीन को हड़पने का मास्टरमाइंड नरोत्तम राव घाड़गे पिता लक्ष्मण राव घाड़गे को बताया जा इसने सबसे पहले अपने पिता के नाम दर्ज जमीन को अपने जीजा खेमंत राव मगर के नाम पर करवाया गया फिर करोंड़ों रुपए के सरकारी जमीन को हड़पने के लिए अनुविभागीय अधिकारी राजस्व कोरबा के पास छ ग भू राजस्व संहिता की धारा 89 के तहत आवेदन प्रस्तुत किया गया जिसे पीठासीन अधिकारी गजेन्द्र सिंह ठाकुर ने जांच प्रतिवेदन स्पष्ट नहीं होने से खारिज कर दिया गया लेकिन जब पीठासीन अधिकारी गजेन्द्र सिंह ठाकुर का ट्रांसफर हो गया और नया पीठासीन अधिकारी भास्कर सिंह मरकाम पदस्थ हुए तब फिर से पुराने तथ्य को छुपाते हुए आवेदन लगाया गया और तत्कालीन राजस्व निरीक्षक देवांगन से अपने पक्ष में जांच प्रतिवेदन बनवाया गया और राजस्व कर्मचारियों और अधिकारियों से सांठगांठ करते हुए अपने उस अंदर के जमीन को दादर खुर्द खरमोरा मुख्य मार्ग पर दर्ज करवाया लिया गया l
हमारे द्वारा अगली कड़ी में इस जमीन के वास्तविक मालिक हीराबाई पति गोबिंद से जुड़ा हुआ एक बड़ा खुलासा किया जायेगा तब तक बने रहे हमारे साथ….
