Wednesday, February 11, 2026

Bombay High Court : रेप के दोषी ने जेल में गांधी पर लिखा निबंध, अदालत ने उम्रकैद घटाकर 12 साल की

Must Read

सजा कम करने के पीछे ‘सुधारात्मक न्याय’ का तर्क

अदालत ने पाया कि दोषी पिछले 10 साल से जेल में बंद है। घटना के समय उसकी उम्र बहुत कम थी। जेल प्रशासन की  उसका व्यवहार अन्य कैदियों की तुलना में काफी बेहतर रहा है। दोषी ने जेल में रहते हुए न केवल अपनी पढ़ाई जारी रखी, बल्कि गांधीवादी विचारधारा से जुड़े कार्यक्रमों में भी सक्रिय रूप से हिस्सा लिया।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने टिप्पणी की कि जेल का मुख्य उद्देश्य अपराधी को केवल दंडित करना नहीं, बल्कि उसे समाज के लिए एक बेहतर इंसान बनाना भी है। कोर्ट ने कहा कि यदि कोई कैदी पश्चाताप की भावना दिखा रहा है और सुधार की कोशिश कर रहा है, तो उसे एक मौका मिलना चाहिए। दोषी अब तक 10 साल की सजा काट चुका है, जिसे देखते हुए अदालत ने उसे 12 साल के कठोर कारावास के बाद रिहा करने का आदेश दिया।

Voices from the Ground / Official Statements

“सजा का उद्देश्य प्रतिशोध नहीं, बल्कि सुधार होना चाहिए। कैदी ने जेल की दीवारों के बीच महात्मा गांधी के सिद्धांतों पर निबंध लिखकर यह दर्शाया है कि वह अपनी पुरानी गलतियों को पीछे छोड़ना चाहता है। उसकी कम उम्र और 10 साल के कारावास को ध्यान में रखते हुए सजा में संशोधन आवश्यक था।” — बॉम्बे हाई कोर्ट खंडपीठ

    Latest News

    मानिकपुर में पुलिस कार्रवाई के बाद महिला की मौत, इलाके में आक्रोश

    कोरबा। मानिकपुर चौकी क्षेत्र में मंगलवार को हुई पुलिस कार्रवाई के बाद एक परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट...

    More Articles Like This