Wednesday, February 11, 2026

CG NEWS : बिना हेलमेट मंत्री, विरोध में NSUI और FIR—सड़क नियम बना सियासी मुद्दा

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CG NEWS :  छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के बिना हेलमेट बाइक चलाने का मामला अब पूरी तरह राजनीतिक रंग ले चुका है। मंत्री की कथित नियमों की अनदेखी से शुरू हुआ विवाद अब NSUI नेता पर FIR तक पहुंच गया है, जिससे प्रदेश की राजनीति गरमा गई है।

दरअसल, 23 जनवरी की सुबह दुर्ग शहर विधायक और शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव अपने समर्थकों के साथ शहर भ्रमण पर निकले थे। उसी दौरान यातायात जागरूकता सप्ताह भी चल रहा था, लेकिन मंत्री बिना हेलमेट बाइक चलाते नजर आए। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो खुद मंत्री ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा किया, जो बाद में चर्चा का विषय बन गया।

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“रात 10 से सुबह 8 तक छूट” वाला बयान भी वायरल

मामला तूल पकड़ने पर जब मीडिया ने मंत्री से सवाल किए तो उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि रात 10 बजे से सुबह 8 बजे तक हेलमेट नियमों में शिथिलता रहती है। उन्होंने बताया कि वह सुबह करीब 7 बजकर 10 मिनट पर निकले थे, इसलिए हेलमेट पहनना अनिवार्य नहीं था। मंत्री का यह बयान भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ।

कार्रवाई न होने पर NSUI का विरोध

मंत्री पर ट्रैफिक पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं किए जाने से नाराज NSUI ने विरोध का रास्ता अपनाया। 7 फरवरी को NSUI दुर्ग विधानसभा अध्यक्ष वरुण केवलतानी के नेतृत्व में कार्यकर्ता दुर्ग ट्रैफिक थाना पहुंचे। उन्होंने ट्रैफिक TI युवराज साहू से शिक्षा मंत्री के खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई की मांग की।

इस दौरान NSUI नेता प्रतीकात्मक विरोध के तौर पर चूड़ी, बिंदी और साड़ी लेकर पहुंचे। उनका तर्क था कि जब आम जनता और छात्रों पर बिना हेलमेट के चालान काटे जा रहे हैं, तो मंत्री के मामले में अलग नियम क्यों।

TI से दुर्व्यवहार का आरोप, FIR दर्ज

हालांकि पुलिस का आरोप है कि इस दौरान ट्रैफिक TI के साथ दुर्व्यवहार किया गया। इसी आधार पर कोतवाली पुलिस ने NSUI नेता वरुण केवलतानी के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। इस कार्रवाई के बाद मामला और ज्यादा तूल पकड़ता नजर आ रहा है।

कांग्रेस ने उठाए सवाल

दुर्ग ग्रामीण कांग्रेस जिलाध्यक्ष राकेश ठाकुर ने कहा कि बिना हेलमेट घूमना और निरीक्षण करना किसी भी जनप्रतिनिधि, खासकर एक मंत्री को शोभा नहीं देता। उन्होंने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।

अब सवाल यह है कि सड़क सुरक्षा नियम सबके लिए बराबर हैं या फिर सत्ता में बैठे लोगों के लिए अलग। फिलहाल, यह मामला कानून, राजनीति और प्रतीकात्मक विरोध के बीच फंसा हुआ नजर आ रहा है।

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