कोरबा: जमीन का ‘चमत्कार’ या करोड़ों का भ्रष्टाचार? मुख्य मार्ग की सरकारी जमीन पर कब्जाने के लिए 2 किमी ‘सरका’ दी निजी जमीन

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कोरबा। जमीन न उड़ती है, न चलती है—लेकिन कोरबा जिले में सामने आए एक मामले ने इस कहावत को झुठला दिया है। कोरबा तहसील के राजस्व ग्राम दादरखुर्द (पहना-21) में कास्तकार हरिहर राव मगर और उनके पिता खेमंत राव मगर पर तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) गजेन्द्र सिंह ठाकुर से सांठगांठ कर बड़ी जमीन हेराफेरी का गंभीर आरोप लगा है।

सूत्रों के मुताबिक, हरिहर राव मगर के नाम दर्ज खसरा नं. 1566, 1570 और 1572 (कुल रकबा 1.84 एकड़), जो मूल रूप से दादरखुर्द के बोईरमुड़ा खार (कुम्हार पारा) क्षेत्र में स्थित थी, उसे कथित तौर पर खरमोरा–दादरखुर्द मुख्य मार्ग पर स्थित शासकीय भूमि खसरा नं. 273 और 274 पर स्थापित करा दिया गया। आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी जमीन का निजीकरण किया गया।

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क्या है पूरा मामला
शिकायत के अनुसार, ग्राम दादरखुर्द की मसाहती पुराना खसरा नं. 206 (1.84 एकड़) पहले हीराबाई पति गोबिंद के नाम दर्ज थी। बाद में वर्ष 2000 के दशक में इसे कथित रूप से पटवारी से सांठगांठ कर फर्जी तरीके से लक्ष्मण राव पिता नारायण राव के नाम दर्ज कराया गया। बंदोबस्त के दौरान इसी भूमि को योजनाबद्ध तरीके से हरिहर राव मगर के नाम रजिस्ट्री कराई गई, जिसका नवीन खसरा नंबर 1566, 1570 व 1572 हुआ।

आरोप है कि भू-माफिया नरोत्तम राव घाड़गे व उसके साथियों ने बेजा आर्थिक लाभ के लिए इस भूमि को उसके मूल स्थान से करीब 2 किलोमीटर दूर स्थित खरमोरा बस्ती की सरहद से लगी शासकीय भूमि (खसरा 273-274) पर स्थापित कराया। बताया जा रहा है कि पटवारी जांच प्रतिवेदन स्पष्ट न होने के बावजूद, छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 89 के तहत रा.प्र.क्र. 58/अ-6-अ/2014-15 में 27 अप्रैल 2016 को कथित रूप से अवैध आदेश पारित कराया गया।

बिक्री की कोशिश और विवाद
सूत्रों का दावा है कि संबंधित शासकीय भूमि को करोड़ों रुपये में बेचने की कोशिश भी की जा रही है, जबकि कब्जे को लेकर पड़ोसी किसानों से विवाद खड़ा किया जा रहा है। पूर्व में भी इसी क्षेत्र की सरकारी भूमि को मलमामय कब्जे के रूप में बेचने की शिकायत सामने आई थी, जिसकी जांच कर पटवारी द्वारा प्रतिवेदन सौंपा जा चुका है।

उच्चस्तरीय जांच की मांग
मामले की शिकायत कलेक्टर सहित उच्च अधिकारियों से की गई है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि उच्चस्तरीय जांच कराकर जमीन को उसके मूल स्थान पर पुनः स्थापित किया जाए और दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। प्रशासनिक हलकों में इस प्रकरण को लेकर हलचल है और कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

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