इंदौर के महादेवपुरा की यह तस्वीर उन लोगों की बोलती बंद करने के लिए काफी है, जो एक जननेता को कम आंकने की भूल करते हैं। जिनको बहुत से लोग ‘पप्पू’ कहकर उनके कद को छोटा करने की कोशिश करते रहे, आज वही शख्स पत्रकारिता के समंदर के बीच अडिग खड़ा है। गौर करने वाली बात यह है कि जितने न्यूज चैनलों की माइक आईडी उनके सामने सजी है, उससे कहीं ज्यादा पत्रकारों के तीखे सवालों का घेरा उन्हें घेरे रहता है।
यह दृश्य उन “महाबली” नेताओं के लिए एक आईना है, जो बंद कमरों में टेलीप्रॉम्प्टर के सहारे अपनी बात तो कर लेते हैं, लेकिन खुले मैदान में प्रेस कॉन्फ्रेंस और पत्रकारों के बेबाक सवालों का सामना करने से उनकी रूह कांपती है। लोकतंत्र का असली नायक वही है जो जनता के बीच जाकर, पसीने से लथपथ होकर, बिना किसी स्क्रिप्ट के सवालों की बौछार झेलने का साहस रखता है।
निश्चित रूप से, यह उनके सामने एक सवालिया निशान है जो सालों-साल सत्ता में रहने के बावजूद एक खुली प्रेस कॉन्फ्रेंस करने का ‘जिगर’ नहीं जुटा पाए।
