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जगदलपुर, 14 जनवरी 2026/ जिले में रोजगार और स्वरोजगार की संभावनाओं को नई दिशा देने के लिए जिला प्रशासन ने अब स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक कला को केंद्र में रखकर आगे बढ़ने का निर्णय लिया है। कलेक्टर श्री हरिस एस. की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित कौशल विकास समिति की बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि बस्तर की पहचान, यहां की हस्तशिल्प कला और वन संपदा ही युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की नींव बनेगी।
कलेक्टर श्री हरिस ने बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री प्रतीक जैन और अन्य विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि बस्तर अंचल हस्तशिल्प और कला के क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान और महारत रखता है। इसी को ध्यान में रखते हुए युवाओं को हस्तशिल्प और हथकरघा के क्षेत्र में विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जाए। इसका उद्देश्य केवल स्थानीय कला को संरक्षित करना नहीं है, बल्कि बाजार की मांग के अनुसार युवाओं को इतना दक्ष बनाना है कि प्रशिक्षण पूरा होते ही उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिल सकें।
कलेक्टर ने जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र को जिले में स्थापित उद्योगों की वर्तमान मांग का गहन अध्ययन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उद्योगों को जिस तरह के स्किल्ड मैनपावर की आवश्यकता है, उसी के अनुरूप युवाओं के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाए, ताकि युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार प्रदान किया जा सके। इसके साथ ही कृषि विज्ञान केंद्र के माध्यम से प्राकृतिक खेती, मशरूम उत्पादन और क्षेत्र में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध वनोपजों के प्रसंस्करण का प्रशिक्षण देने की रूपरेखा भी तैयार की गई है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके।
इस अभियान को धरातल पर उतारने के लिए औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान, रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केंद्र और शासकीय महिला पॉलिटेक्निक, कृषि विज्ञान केंद्र को सक्रिय भूमिका निभाने कहा गया है। इन संस्थानों को उपलब्ध मानव संसाधन के अनुसार युवाओं का पंजीयन करवाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि जिले के युवाओं को कौशल विकास योजनाओं का सीधा लाभ मिल सके।