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Lata Mangeshkar , नई दिल्ली। भारतीय संगीत जगत में कुछ ही ऐसे नाम हैं, जिनकी आवाज़ समय की सीमाओं को तोड़कर पीढ़ियों तक दिलों में बस जाती है। इन्हीं में एक नाम है हेमंत कुमार—वह गायक, जिनकी गंभीर, गूंजती और आत्मा को छू लेने वाली आवाज़ ने उन्हें लता मंगेशकर जैसे महान कलाकारों की कतार में खड़ा कर दिया। कहा जाता है कि करीब 60 वर्षों के करियर में उन्होंने हजारों नहीं, बल्कि पचास हजार के आसपास गीतों को अपनी आवाज़ दी, जो अपने आप में एक अद्भुत उपलब्धि है।
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सदाबहार गीतों से बनाई पहचान
‘गोरी तेरा गांव बड़ा प्यारा’, ‘चांद अकेला जाए सखी रे’, ‘माना हो तुम बेहद हसीन’, ‘प्यार कर ले गोरी’ और भक्ति से ओतप्रोत ‘उठो हे लाल, उठो हे नारायण आये’ जैसे गीत आज भी उतने ही ताजे लगते हैं, जितने अपने समय में थे। हेमंत कुमार की आवाज़ में एक अलग तरह की ठहराव और गहराई थी, जो सीधे दिल तक उतर जाती थी। रोमांटिक गीत हों या दर्द से भरे नग़मे, भजन हों या फिल्मी गीत—हर शैली में उन्होंने अपनी छाप छोड़ी।
सिर्फ गायक नहीं, एक संपूर्ण संगीतकार
हेमंत कुमार केवल एक महान गायक ही नहीं थे, बल्कि संगीतकार और निर्माता के रूप में भी उन्होंने हिंदी सिनेमा को कई यादगार रचनाएं दीं। उन्होंने बांग्ला, हिंदी समेत कई भारतीय भाषाओं में काम किया और संगीत को व्यवसाय से ज्यादा साधना माना। उनके लिए सुर और भाव ही सबसे बड़ा सम्मान थे।
लता मंगेशकर के समकक्ष क्यों माने गए
लता मंगेशकर जहां सुरों की देवी कही जाती हैं, वहीं हेमंत कुमार को उनकी पुरुष आवाज़ का सबसे सशक्त समानांतर माना गया। दोनों ने एक-दूसरे के साथ कई अमर गीत दिए और गुणवत्ता के मामले में कभी समझौता नहीं किया। यही कारण है कि संगीत प्रेमी आज भी उन्हें एक ही पंक्ति में याद करते हैं।