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Hardik Pandya , नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या एक समय टेस्ट क्रिकेट में टीम इंडिया की सबसे बड़ी ताकत माने जाते थे। तेज गेंदबाजी के साथ आक्रामक बल्लेबाजी करने की उनकी क्षमता टीम के संतुलन को मजबूती देती थी। विदेशी दौरों पर, खासकर इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका जैसी परिस्थितियों में, हार्दिक की मौजूदगी भारत को अतिरिक्त बढ़त दिलाती थी।
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चोटों ने बदला करियर का रास्ता
हार्दिक पांड्या ने 2017 में टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू किया था और कम समय में ही अपनी पहचान बना ली थी। 2018 के इंग्लैंड दौरे पर उनका शतक आज भी भारतीय क्रिकेट फैंस के लिए यादगार है। हालांकि, पीठ और कमर की गंभीर चोटों ने उनके करियर की दिशा बदल दी। फिटनेस को लेकर लगातार संघर्ष के बाद हार्दिक ने खुद टेस्ट क्रिकेट न खेलने का फैसला लिया, ताकि वह सीमित ओवरों के फॉर्मेट में लंबे समय तक भारत के लिए उपलब्ध रह सकें।
सीमित ओवरों में शानदार वापसी
टेस्ट से दूरी बनाने के बाद हार्दिक ने वनडे और टी20 में खुद को नए सिरे से स्थापित किया। आईपीएल में कप्तानी करते हुए गुजरात टाइटंस को खिताब दिलाना और इसके बाद टीम इंडिया में एक भरोसेमंद ऑलराउंडर की भूमिका निभाना उनकी वापसी की कहानी को मजबूत बनाता है। हाल के वर्षों में उनकी फिटनेस में भी काफी सुधार देखने को मिला है, जिससे एक बार फिर फैंस और क्रिकेट विशेषज्ञ उनके टेस्ट क्रिकेट में लौटने की संभावनाओं पर चर्चा करने लगे हैं।
क्यों उठ रही है टेस्ट में वापसी की मांग?
भारतीय टेस्ट टीम इस समय तेज गेंदबाजी ऑलराउंडर की कमी से जूझ रही है। विदेशी दौरों पर टीम को ऐसे खिलाड़ी की जरूरत होती है जो गेंद और बल्ले दोनों से योगदान दे सके। हार्दिक पांड्या इस भूमिका में पूरी तरह फिट बैठते हैं। अगर वह टेस्ट में लौटते हैं तो टीम को पांचवें गेंदबाज के साथ-साथ निचले क्रम में आक्रामक बल्लेबाज मिल सकता है, जो मैच का रुख पलटने में सक्षम हो।