Saturday, January 17, 2026

New Year 2026 : नए साल का स्वागत, उत्सव का उल्लास और सात्विकता का संगम—खूब जिएं और ‘अमृत’ पिएं

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New Year 2026 : कैलेंडर के पन्ने पलटने को हैं और हवाओं में एक नई शुरुआत की महक है। जैसे ही 31 दिसंबर की रात करीब आती है, हर मन में एक ही सवाल कौंधता है: “नया साल कैसे मनाएं?” शोर-शराबे और पाश्चात्य चकाचौंध के बीच, उत्सव की एक ऐसी अवधारणा उभर रही है जो केवल बाहरी चमक-धमक तक सीमित नहीं, बल्कि आत्मा की गहराई को छूती है।

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उत्सव आपका, निर्णय भी आपका

नया साल मनाने का कोई एक तय फॉर्मूला नहीं हो सकता। हर व्यक्ति की खुशियाँ अलग हैं और उनके व्यक्त करने के तरीके भी। सच तो यह है कि प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं यह निर्णय लेने का अधिकार है कि वह अपने जीवन के इस नए अध्याय का स्वागत कैसे करना चाहता है। लेकिन, इस स्वतंत्रता के बीच एक विचारणीय प्रश्न यह है कि क्या हमारा उत्सव हमें केवल पल भर की खुशी दे रहा है या वह हमें भीतर से समृद्ध कर रहा है?

जीवन में उत्सव का होना अनिवार्य है। उत्सव आनंद की पराकाष्ठा है, लेकिन वह ‘सात्विक’ हो, तो उसका आनंद कई गुना बढ़ जाता है। सात्विक उत्सव का अर्थ यह नहीं कि आप खुशियाँ न मनाएं, बल्कि इसका अर्थ है कि आपकी खुशी में होश हो, प्रेम हो और वह दूसरों को भी आनंदित करे। जब उत्सव सात्विकता की नींव पर खड़ा होता है, तो वह केवल एक तारीख का बदलाव नहीं, बल्कि जीवन की दिशा का बदलाव बन जाता है।

खूब जियो और खूब पियो: एक नया दृष्टिकोण

अकसर उत्सवों में ‘पीने’ का जिक्र होते ही ध्यान नशीले पदार्थों की ओर जाता है, लेकिन यहाँ नजरिया बिल्कुल अलग है। जीवन का असली उत्सव वह है जहाँ आप कहें—”खूब जियो और खूब पियो।” यहाँ पीने का तात्पर्य उस ‘अमृत’ से है जो हमारी प्राचीन परंपराओं और सत्संग में छिपा है। हमारे शास्त्रों में कथा को ‘कथा-अमृत’ कहा गया है।

सत्संग वह अमृत है जो चित्त की प्यास बुझाता है। नए साल के अवसर पर यदि हम इस आध्यात्मिक रस का पान करें, तो वह केवल एक रात का नशा नहीं, बल्कि जीवन भर का होश बन जाएगा। जब आप सत्संग और अच्छी चर्चाओं के रस को पीते हैं, तो जीवन में एक नया उत्साह और ओज आता है। यह अमृत आपको जीवन जीने की नई कला सिखाता है, जहाँ हर दिन एक नया साल और हर पल एक नया उत्सव महसूस होता है।

भविष्य की ओर एक कदम

नए साल का संकल्प केवल बुरी आदतों को छोड़ने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि अच्छी आदतों को अपनाने का संकल्प होना चाहिए। सात्विक उत्सव हमें प्रकृति और समाज के करीब लाता है। चाहे वह ध्यान हो, सेवा हो या परिवार के साथ बिताए गए शालीन पल, ये सभी उत्सव के ही रूप हैं। 2026 की दहलीज पर खड़े होकर, यह चुनाव हमारा है कि हम केवल शोर का हिस्सा बनेंगे या शांति और आनंद के उस अमृत को पिएंगे जो जीवन को धन्य कर देता है।

विद्वानों का सार

“नया साल मनाना व्यक्तिगत निर्णय है, लेकिन उत्सव सात्विक होना चाहिए। मैं कहता हूं खूब जियो और खूब पियो—कथा और सत्संग के उस अमृत को, जो जीवन को नई ऊंचाई देता है।”

यह विचार हमें याद दिलाता है कि उत्सव का असली उद्देश्य स्वयं को और अधिक जीवंत महसूस कराना है, न कि स्वयं को खो देना।

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