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नई दिल्ली। अमेरिका के बाद अब मैक्सिको ने भी भारत समेत कई एशियाई देशों पर भारी-भरकम टैरिफ लगाने का बड़ा कदम उठाया है। 10 दिसंबर को मैक्सिकन सीनेट ने एक महत्वपूर्ण बिल पास किया, जिसके तहत चीन, भारत, साउथ कोरिया, थाईलैंड और इंडोनेशिया से आयात होने वाले उत्पादों पर 50% तक का टैरिफ लगाने का प्रावधान किया गया है। यह टैरिफ वर्ष 2026 से लागू होगा।
ट्रंप की संरक्षणवादी नीति जैसा कदम
मैक्सिको का यह फैसला अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की संरक्षणवादी नीतियों से मिलता-जुलता है। विशेषज्ञों का मानना है कि मैक्सिको ने यह कदम अमेरिका के साथ अपने आर्थिक और राजनीतिक संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह टैरिफ निर्णय ट्रंप को खुश करने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।
भारत सहित एशियाई देशों पर सीधा असर
इस टैरिफ से भारत के टेक्सटाइल, स्टील, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो पार्ट्स और फर्टिलाइज़र जैसे कई सेक्टर प्रभावित हो सकते हैं। मैक्सिको भारत के लिए लैटिन अमेरिका में एक महत्वपूर्ण व्यापारिक बाजार है, ऐसे में 50% तक बढ़ी लागत से भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा क्षमता कमजोर हो सकती है।
व्यापार पर पड़ेगा बड़ा असर
व्यापार विशेषज्ञों के अनुसार—
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भारतीय कंपनियों के लिए मैक्सिको के बाजार में निर्यात महंगा हो जाएगा।
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मैक्सिको घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देना चाहता है।
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एशियाई देशों पर निर्भरता कम करने की नीति भी इसका कारण हो सकती है।
2026 से लागू होगा नया टैरिफ कानून
सीनेट में पास हुए बिल के अनुसार, भारी आयात शुल्क 2026 से लागू किया जाएगा, ताकि स्थानीय उद्योगों को मजबूत किया जा सके और विदेशी वस्तुओं के मुकाबले घरेलू उत्पादों को प्राथमिकता दी जा सके।
भारत की तरफ से प्रतिक्रिया का इंतजार
भारत सरकार की ओर से इस पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन यह फैसला निश्चित रूप से भारत-मेक्सिको व्यापार संबंधों पर असर डाल सकता है।