कुसमुंडा, कोरबा। केंद्र सरकार द्वारा श्रम कानूनों में बड़े फेरबदल और कई पुराने लेबर नियमों को निरस्त कर नए श्रम कानून लागू किए जाने के विरोध में कुसमुंडा क्षेत्र की विभिन्न यूनियनों ने सोमवार को प्रबंधन कार्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन किया। यूनियन प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि नए श्रम कानून मजदूरों के अधिकारों को कमजोर करते हैं और रोजगार सुरक्षा पर गंभीर असर डालते हैं।
नई श्रम नीति के खिलाफ मजदूरों का गुस्सा
कुसमुंडा क्षेत्र की ट्रेड यूनियनों ने सामूहिक रूप से प्रदर्शन करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने मजदूरों की सहमति के बिना लेबर कोड लागू कर मजदूर हितों की अनदेखी की है। उनका कहना है कि नए कानूनों में ओवरटाइम, छुट्टी, सुरक्षा और वेतन से जुड़ी कई सुविधाओं में कटौती की गई है, जिससे मजदूर असंतोष बढ़ रहा है।
प्रबंधक कार्यालय के बाहर नारेबाजी
प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में मजदूर और यूनियन पदाधिकारी मौजूद रहे। उन्होंने केंद्र सरकार के फैसले को ‘मजदूर विरोधी’ बताते हुए जमकर नारेबाजी की। यूनियनों ने स्पष्ट कहा कि यदि श्रम कानूनों में मजदूर हितों को सुरक्षित नहीं किया गया, तो विरोध प्रदर्शन और उग्र रूप ले सकता है।
यूनियनों ने सौंपा ज्ञापन
यूनियन प्रतिनिधियों ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को एक ज्ञापन सौंपकर मांग की कि नए श्रम कानून लागू करने से पहले मजदूर संगठनों से चर्चा की जाए और पुराने लाभकारी नियमों को बहाल किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि मजदूरों के अधिकारों में किसी भी प्रकार की कटौती बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सरकार के निर्णय पर सवाल
यूनियन नेताओं ने कहा कि लेबर कोड लागू होने से कंपनियों को मनमानी छंटनी, लंबी कार्य अवधि और न्यूनतम सुरक्षा प्रावधानों का रास्ता मिलेगा, जिससे मजदूरों का भविष्य असुरक्षित हो जाएगा। उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार तुरंत इस निर्णय को वापस ले और श्रमिक हितों को प्राथमिकता दे।
