नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर आदिवासी समाज के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि आदिवासी गौरव हजारों सालों से भारत की चेतना और परंपरा का हिस्सा रहा है। प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि देश की आज़ादी की लड़ाई हो या राष्ट्रीय सम्मान की बात – आदिवासी समाज हमेशा सबसे आगे रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने यह संबोधन बिरसा मुंडा की जयंती पर दिया, जिनकी जयंती को उनकी सरकार ने जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा ने न केवल स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, बल्कि आदिवासी समाज के सशक्तिकरण और उनके अधिकारों की रक्षा में भी योगदान दिया।
प्रधानमंत्री ने आदिवासी युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि उन्हें अपनी संस्कृति, परंपरा और गौरव पर गर्व करना चाहिए और देश की प्रगति में योगदान देना चाहिए। उन्होंने यह भी जोर दिया कि सरकार आदिवासी समाज के सशक्तिकरण और विकास के लिए लगातार प्रयासरत है।
जनजातीय गौरव दिवस को मनाने का उद्देश्य न केवल आदिवासी नेताओं और स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को याद करना है, बल्कि आदिवासी संस्कृति और उनकी सामाजिक-आर्थिक प्रगति को भी बढ़ावा देना है।
प्रधानमंत्री मोदी का यह संदेश आदिवासी समुदाय के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है और इसे सामाजिक एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर व्यापक रूप से साझा किया जा रहा है।
