बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर में 75दिनों तक मनाये जाने वाले ऐतिहासिक विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा पर्व में जोगी बिठाई की रस्म पूरे विधि विधान से पूरी की गई। मावली देवी की पूजा-अर्चना के बाद आमाबाल निवासी रघुनाथ नाग को सिरहासार भवन पहुंचाया गया। जहां 4 फीट के गड्ढे में जोगी निर्विघ्न दशहरा संपन्नता के लिए 9 दिनों तक दंतेश्वरी माई की साधना करेंगे। बस्तर दशहरा पर्व में सालों से चली आ रही परंपरा के अनुसार मंगलवार शाम को सिरहासार भवन में जोगी बिठाई पूजा की गई। बड़े आमाबाल के रघुनाथ नाग जोगी के रूप में पांचवीं बार जोगी के तप का निर्वहन करेंगे। बस्तर दशहरा समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि सिरहासार भवन के अंदर 6 बाई 3 बाई 4 का गड्ढा बनाया है। इसके अंदर रघुनाथ नाग को जोगी के रूप में बिठाया है। जोगी को 9 दिन बाद ही गड्ढे से बाहर निकाला जाएगा।
रघुनाथ के रिश्तेदार ने बताया कि रघुनाथ नाग पांचवीं बार जोगी बनकर बैठा है। बस्तर दशहरा के लिए यह रस्म करीब 610 से अधिक सालों से चली आ रही है।
बता दें बस्तर दशहरा की सबसे बड़ी रस्म जोगी बिठाई है। मांझी-चालकी और पुजारी की मौजूदगी में जोगी को नए वस्त्र पहनाए गए। इसके बाद उसे गाजे-बाजे के साथ कपड़ों के पर्दे की आड़ में सिरहासार भवन के पास स्थित मावली माता मंदिर ले जाया गया। इस दौरान मंदिर में रखी तलवार की पूजा कर उसे जोगी को दिया गया। इस तलवार को लेकर जोगी वापस सिरहासार भवन में पहुंचे। पुजारी के प्रार्थना के बाद उपवास कर संकल्प लेकर एक कुंड में बैठ गए।
