Getting your Trinity Audio player ready...
|
नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर पारंपरिक मूल्यों को संरक्षित रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक परिवार को अपनी भाषा, परंपरा, वेशभूषा और संस्कृति को संजोकर रखना चाहिए, क्योंकि यही हमारी असली पहचान है।
भागवत ने कहा कि तकनीक और आधुनिकता शिक्षा के विरोधी नहीं हैं। शिक्षा का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं है, बल्कि व्यक्ति को सुसंस्कृत बनाना है। उन्होंने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) की सराहना करते हुए कहा कि इसमें पंचकोसीय शिक्षा का प्रावधान शामिल किया गया है, जो छात्रों के समग्र विकास में सहायक होगा।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि भारत की प्राचीन संस्कृति और ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा प्रणाली के साथ जोड़कर ही राष्ट्र को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाया जा सकता है।