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नई दिल्ली।’ केंद्र सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि अगर राज्यपाल विधेयकों पर कोई फैसला नहीं लेते हैं तो राज्यों को कोर्ट की बजाय बातचीत से हल निकालना चाहिए।
केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सभी समस्याओं का समाधान अदालतें नहीं हो सकतीं। लोकतंत्र में संवाद को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। हमारे यहां दशकों से यही प्रथा रही है।
CJI बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की बेंच ने गुरुवार को लगातार तीसरे दिन भारत के राज्यपाल और राष्ट्रपति की तरफ से बिल को मंजूरी, रोक या रिजर्वेशन मामले की सुनवाई की। बेंच में CJI के अलावा जस्टिस सूर्यकांत, विक्रम नाथ, पी एस नरसिम्हा और ए एस चंदुरकर शामिल हैं।