Saturday, January 17, 2026

फरिश्ता बनकर आए नजाकत: पहलगाम हमले में 11 छत्तीसगढ़वासियों की जान बचाई, मामा की मौत के बाद भी निभाई इंसानियत

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चिरमिरी (MCB)। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले में जहां गोलियों की बौछार में अफरा-तफरी मच गई, वहीं अनंतनाग निवासी नजाकत अहमद शाह ने अपने अदम्य साहस और इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए छत्तीसगढ़ के 11 लोगों की जान बचा ली। इस हमले में उनके सगे मामा आदिल हुसैन शाह की मौत हो गई, लेकिन नजाकत ने हिम्मत नहीं हारी और सभी को सुरक्षित श्रीनगर एयरपोर्ट तक पहुंचाया।

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घटना बेसरन घाटी, जिसे ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ कहा जाता है, में घटी। चिरमिरी से गए चार दंपति—सुभाष जैन, हैप्पी बढ़वान, लकी पाराशर और टीटू अग्रवाल अपने तीन बच्चों के साथ पहलगाम घूमने पहुंचे थे। तभी आतंकियों ने धर्म पूछ-पूछ कर पर्यटकों पर फायरिंग शुरू कर दी। गोलियों की आवाज़ और चीख-पुकार के बीच नजाकत ने बच्चों को गोद और पीठ पर उठाकर, सभी को सुरक्षित पार्किंग स्थल तक पहुंचाया।

नजाकत पिछले 15 वर्षों से सरगुजा संभाग में गर्म कपड़े बेचने आते हैं। बलरामपुर-रामानुजगंज और चिरमिरी के अनेक परिवारों से उनका गहरा संबंध है। उनकी ईमानदारी और सादगी की चर्चा वर्षों से होती रही है। उनके पिता भी इस व्यवसाय से जुड़े थे।

हमले के दौरान नजाकत के मामा आदिल हुसैन शाह आतंकियों से भिड़ते हुए शहीद हो गए, लेकिन नजाकत उनके जनाजे में भी शामिल नहीं हो सके क्योंकि उन्होंने पहले छत्तीसगढ़ के परिवारों को सुरक्षित एयरपोर्ट पहुंचाना जरूरी समझा।

नजाकत की इस बहादुरी और इंसानियत की सराहना कश्मीर और छत्तीसगढ़ दोनों जगह की जा रही है। स्थानीय लोगों और प्रशासन ने उन्हें “फरिश्ता” बताया है। कुलदीप स्थापक के मामा राकेश परासर ने कहा, “नजाकत की सूझबूझ ने हमारे परिवार को नई ज़िंदगी दी, वो हमारे लिए ईश्वर से कम नहीं।”

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